मुख्य तथ्य

  • बाबर ने 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल सत्ता की नींव रखी।
  • 1527 का खनवा युद्ध मेवाड़ के राणा सांगा के विरुद्ध बाबर की नई सत्ता की परीक्षा था और दिल्ली-आगरा से उसके निष्कासन की संभावना रोकता है।
  • शेर शाह सूरी ने 1539 के चौसा और 1540 के कन्नौज युद्धों में हुमायूँ को हराकर सूर अंतराल खोला।
  • 1556 के पानीपत द्वितीय युद्ध में बैरम खाँ के नेतृत्व में अकबर की सत्ता हेमू के विरुद्ध फिर स्थापित हुई।
  • 1562 के अकबर-भारमल गठबंधन ने आमेर के कछवाहा घराने को मुग़ल सेवा में जोड़ा और मेवाड़ की स्वायत्त नीति से अलग राह दिखाई।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    बाबर ने 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहीम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल सत्ता की नींव रखी।

  2. 2

    1527 का खनवा युद्ध मेवाड़ के राणा सांगा के विरुद्ध बाबर की नई सत्ता की परीक्षा था और दिल्ली-आगरा से उसके निष्कासन की संभावना रोकता है।

  3. 3

    शेर शाह सूरी ने 1539 के चौसा और 1540 के कन्नौज युद्धों में हुमायूँ को हराकर सूर अंतराल खोला।

  4. 4

    1556 के पानीपत द्वितीय युद्ध में बैरम खाँ के नेतृत्व में अकबर की सत्ता हेमू के विरुद्ध फिर स्थापित हुई।

  5. 5

    1562 के अकबर-भारमल गठबंधन ने आमेर के कछवाहा घराने को मुग़ल सेवा में जोड़ा और मेवाड़ की स्वायत्त नीति से अलग राह दिखाई।

  6. 6

    1576 के हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप का सामना आमेर के राजा मानसिंह प्रथम के नेतृत्व वाली मुग़ल मैदानी सेना से हुआ।

  7. 7

    1674 में रायगढ़ पर शिवाजी का राज्याभिषेक स्वतंत्र मराठा राजसत्ता की घोषणा था और अष्टप्रधान परिषद से समर्थित था।

  8. 8

    1761 के पानीपत तृतीय युद्ध ने अहमद शाह अब्दाली के विरुद्ध कमजोर गठबंधन-सहयोग के कारण उत्तर भारत में मराठा विस्तार रोक दिया।

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बाबर ने भारत में मुग़ल सत्ता कैसे स्थापित की?

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने काबुल को आधार बनाकर पानीपत, खनवा, चंदेरी और घाघरा के क्रमिक अभियानों से दिल्ली-आगरा केंद्र पर अधिकार किया और भारत में मुग़ल सत्ता स्थापित की। एनसीईआरटी के अनुसार बाबर का शासनकाल 1526 से 1530 तक रहा और 1526 में उसने इब्राहीम लोदी को पानीपत में हराकर दिल्ली-आगरा अपने अधिकार में लिया।

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर (मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक) ने काबुल, पानीपत, खनवा, चंदेरी और घाघरा के क्रम से भारत में मुग़ल सत्ता की स्थापना संभव की।

प्रारंभिक जीवन और मध्य एशियाई आधार

  • जन्म: 14 फरवरी 1483 को अंदीजान में हुआ।
  • उत्तराधिकार: 1494 में 12 वर्ष की आयु में फरगना का उत्तराधिकार पाया।
  • वंश:
  • पिता की ओर से उसका वंश उमर शेख मिर्जा के ज़रिए तैमूर से जुड़ता था।
  • माता की ओर से यूनुस खान के ज़रिए चंगेज़ खान से जुड़ता था।
  • राजनीतिक अर्थ: इस तैमूरी-चंगेज़ी विरासत ने बाबर को मध्य एशियाई सार्वभौम दावे की प्रतिष्ठा दी, पर उससे स्थिर सत्ता नहीं मिली।
  • समरकंद: समरकंद के लिए बार-बार के संघर्ष विफल रहे।
  • काबुल: निर्णायक मोड़ 1504 में आया, जब उसने काबुल पर अधिकार किया। काबुल ने उसे सुरक्षित आधार, पंजाब की राह और वही सैनिक गहराई दी, जिससे आगे चलकर भारत में मुग़ल सत्ता की स्थापना संभव हुई।

अभियान-क्रम

युद्ध / अभियानतिथि / वर्षप्रतिद्वंद्वी / संबंधप्रमुख तथ्यपरिणाम / महत्त्व
पानीपत का प्रथम युद्ध21 अप्रैल 1526दिल्ली के उत्तर में इब्राहीम लोदीबाबर ने लगभग 12,000 सैनिकों से सामना किया; प्रतिपक्ष को सामान्यतः 100,000 सैनिक और 1,000 हाथियों वाला बल माना जाता है; उस्ताद अली कुली के नेतृत्व में बारूदी बंदूकों और मैदानी तोपखाने का उपयोग हुआ; तुलगमा ने शत्रु के किनारों पर घूमकर दबाव बनायाइब्राहीम लोदी युद्धभूमि में मारा गया, लोदी सल्तनत का अंत हुआ और दिल्ली-आगरा बाबर के अधिकार में आ गए
खनवा17 मार्च 1527मेवाड़ के राणा साँगासाँगा के परिसंघ में हसन खान मेवाती और महमूद लोदी शामिल थे; अभियान से पहले बाबर ने मदिरा-त्याग की घोषणा की, संघर्ष को जिहाद का रूप दिया और तमगा समाप्त किया; युद्ध में तोपखाना, रक्षात्मक व्यवस्था और तुलगमा साथ काम आएराणा साँगा घायल होकर हटे और 1528 में उनकी मृत्यु हो गई; खनवा ने दिल्ली-आगरा के केंद्र से बाबर को हटाने की मेवाड़-नेतृत्व वाली संभावना को अवरुद्ध कर दिया
चंदेरी1528मेदिनी रायइस विजय के साथ जुड़ा जौहर उस संघर्ष की तीव्रता को दिखाता हैबाबर ने अपने अधिकार की शेष कमजोरियों पर आघात किया
घाघरा1529महमूद लोदी और बंगाल के नुसरत शाह से जुड़ा अफ़ग़ान-बंगाल संयोजन1529 के अंत तक बाबर ने गंगीय मैदान में अफ़ग़ान चुनौती को काफी हद तक दबा दियाकाबुल से बिहार तक फैली सत्ता पर नियंत्रण स्थापित हुआ, यद्यपि बंगाल अभी उसके प्रत्यक्ष अधिकार में नहीं आया था

पानीपत का महत्त्व

  • बाबर अभी पूरे भारत का स्वामी नहीं बना था, पर अब उसके पास वही राजनीतिक केंद्र था जहाँ से राजस्व, राजसत्ता के प्रतीक और आगे के अभियान व्यवस्थित किए जा सकते थे।
  • 1526 का पानीपत केवल वंश परिवर्तन नहीं था, बल्कि उत्तर भारत में तोपखाने से समर्थित खुली मैदानी युद्धकला की निर्णायक स्थापना भी था।

बाबरनामा और स्मृति

  • स्रोत: बाबरनामा बाबर के जीवन को समझने का सबसे निकटस्थ स्रोत है।
  • भाषा और अनुवाद: यह चग़ताई तुर्की में लिखा गया और अकबर के समय अब्दुर रहीम खान-ए-खाना ने इसका फ़ारसी अनुवाद कराया।
  • विषय-वस्तु: इसमें युद्धों के साथ नदियों, बाग़ों, फलों, नगरों और हिंदुस्तान की जलवायु पर भी प्रत्यक्ष टिप्पणियाँ मिलती हैं, इसलिए यह केवल दरबारी आख्यान नहीं है।
  • मृत्यु और उत्तराधिकार: 26 दिसंबर 1530 को आगरा में उसकी मृत्यु हुई और 1530 में हुमायूँ उसका उत्तराधिकारी बना।
  • समाधि: बाद में उसकी इच्छा के अनुसार उसके अवशेष काबुल के बाग़-ए-बाबर में रखे गए।
  • राजस्थान-संबंध: भारत में बाबर की पहली बड़ी साम्राज्यिक स्थापना का सबसे कठोर परीक्षण मेवाड़ के राणा साँगा के विरुद्ध हुआ, इसलिए खनवा मुग़ल विस्तार और राजपूत राज्यकला के मिलन-बिंदु के रूप में याद किया जाता है।
  • समग्र क्रम: पानीपत, खनवा, चंदेरी और घाघरा का यह क्रम बताता है कि बाबर का शासन किसी एक आकस्मिक विजय से नहीं बना था।

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संभावित प्रश्न

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1MCQबाबर के भारत के चार प्रमुख युद्धों को सबसे पहले से सबसे बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।1 अंक · 50 शब्द
  1. Aपानीपत का प्रथम युद्ध -> खनवा -> चंदेरी -> घाघरासही
  2. Bपानीपत का प्रथम युद्ध -> चंदेरी -> खनवा -> घाघरा
  3. Cखनवा -> पानीपत का प्रथम युद्ध -> चंदेरी -> घाघरा
  4. Dपानीपत का प्रथम युद्ध -> खनवा -> घाघरा -> चंदेरी

व्याख्या

सही क्रम पानीपत का प्रथम युद्ध 1526, खनवा 1527, चंदेरी 1528 और घाघरा 1529 है। 1526 के पानीपत में बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराकर दिल्ली और आगरा पर अधिकार पाया, जबकि 1527 के खनवा में उसने मेवाड़ के राणा साँगा के नेतृत्व वाले राजपूत परिसंघ को पराजित किया। 1528 में चंदेरी पर मेदिनी राय के विरुद्ध अभियान हुआ और 1529 में घाघरा में महमूद लोदी तथा नुसरत शाह से जुड़े अफ़ग़ान-बंगाल संयोजन का सामना किया गया। विकल्प ख में चंदेरी को खनवा से पहले रखा गया है, विकल्प ग में क्रम की शुरुआत पानीपत के स्थान पर खनवा से की गई है, और विकल्प घ में घाघरा को चंदेरी से पहले रख दिया गया है।

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