मुख्य तथ्य

  • भारत की बड़ी भौगोलिक इकाइयां पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप हैं।
  • हिमाद्रि-हिमाचल-शिवालिक हिमालयी विभाग को भीतरी से बाहरी पट्टियों के क्रम में पढ़ना चाहिए।
  • भाबर-तराई-बांगर-खादर का जलोढ़ क्रम पर्वत-पाद की कंकरीली भाबर पट्टी से सक्रिय बाढ़-मैदान तक का बदलाव दिखाता है।
  • प्रायद्वीपीय पठार - मध्य उच्चभूमि और दक्कन पठार पुरानी चट्टानों, काली मिट्टी और रिफ्ट घाटियों को समझाता है।
  • पश्चिमी घाट अथवा सह्याद्रि कगार, विच्छिन्न पूर्वी घाट से अधिक ऊंचा और अधिक सतत है।

मुख्य बिंदु

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    भारत की बड़ी भौगोलिक इकाइयां पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप हैं।

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    हिमाद्रि-हिमाचल-शिवालिक हिमालयी विभाग को भीतरी से बाहरी पट्टियों के क्रम में पढ़ना चाहिए।

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    भाबर-तराई-बांगर-खादर का जलोढ़ क्रम पर्वत-पाद की कंकरीली भाबर पट्टी से सक्रिय बाढ़-मैदान तक का बदलाव दिखाता है।

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    प्रायद्वीपीय पठार - मध्य उच्चभूमि और दक्कन पठार पुरानी चट्टानों, काली मिट्टी और रिफ्ट घाटियों को समझाता है।

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    पश्चिमी घाट अथवा सह्याद्रि कगार, विच्छिन्न पूर्वी घाट से अधिक ऊंचा और अधिक सतत है।

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    पश्चिमी राजस्थान का थार मरुस्थल टीले, लूणी और अंतर्देशीय अपवाह वाला गर्म शुष्क उदाहरण है।

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    अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप अलग हैं क्योंकि एक समुद्रतल पर्वत और दूसरा प्रवाल उत्पत्ति से जुड़ा है।

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    अरावली प्राचीन वलित पर्वत तंत्र राजस्थान को भारतीय भौगोलिक विभाजन से सीधे जोड़ता है।

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भारत का व्यापक भौगोलिक ढांचा किन बड़े भागों से बनता है?

भारत का व्यापक भौगोलिक ढांचा छह बड़े भागों से बनता है: उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीप। भारत की जनगणना के 1991 के क्षेत्रीय विभाजन संबंधी मानचित्र विश्लेषण में सीमांकन के 5 भौतिक-भौगोलिक आधार बताए गए हैं: भू-आकृति, भूगर्भीय संरचना, वनावरण, जलवायु दशाएं और मिट्टी। भौगोलिक प्रादेशिक विभाजन में धरातलीय संरचना, प्रक्रिया और स्थलरूप विकास की अवस्था साथ पढ़ी जाती है।

छह बड़े भाग

भारत की धरातलीय बनावट हर जगह एक जैसी नहीं है; इन छह बड़े भागों की चट्टानों की आयु, ढाल, अपवाह और संसाधन अलग-अलग हैं।

बड़ा भागमुख्य भौगोलिक अर्थ
उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वतपर्वतीय इकाई; हिमाद्रि-हिमाचल-शिवालिक इसी में आते हैं
उत्तरी मैदानसिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान नदी-अवसाद से भरा गहरा जलोढ़ गर्त है
प्रायद्वीपीय पठारप्राचीन स्थिर भूखंड; मध्य उच्चभूमि और दक्कन पठार इसी में आते हैं
भारतीय मरुस्थलपवन-कार्य, लवणीय गर्त और जल-अभाव दिखाता है
तटीय मैदानसमुद्री निमज्जन या उन्मज्जन के प्रभाव दिखाते हैं
द्वीपसमुद्रतल पर्वत, ज्वालामुखीय क्रिया और प्रवाल उत्पत्ति का इतिहास बताते हैं

संरचनात्मक अंतर

  • हिमालय युवा, ऊंचा और विवर्तनिक रूप से सक्रिय है।
  • प्रायद्वीपीय भूखंड पुराना, कठोर और अधिक स्थिर है।
  • सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान नदी-अवसाद से भरा गहरा जलोढ़ गर्त है।
  • हिमाद्रि-हिमाचल-शिवालिक हिमालयी विभाग पर्वतीय इकाई में आता है।
  • नर्मदा के उत्तर की मध्य उच्चभूमि और उसके दक्षिण का दक्कन पठार प्रायद्वीपीय भूखंड के भाग हैं।

राजस्थान से संबंध

  • अरावली प्राचीन वलित पर्वत तंत्र प्राचीन भूखंड के किनारे स्थित है।
  • पश्चिमी राजस्थान का थार मरुस्थल अरावली के पश्चिम में उसी व्यापक भूखंड पर फैला है।
  • एक ही राज्य में चट्टानी ऊंचाइयां, रेतीले मैदान, अंतर्देशीय अपवाह और पठारी किनारे साथ दिखते हैं।
  • राजस्थान की स्थिति खास तौर पर उपयोगी है क्योंकि यहां प्राचीन भूखंड, क्षरित वलित पर्वत श्रेणी और गर्म मरुस्थल मिलते हैं।
  • राजस्थान का पश्चिम से पूर्व अनुप्रस्थ काट टीलों और प्लाया जैसे लवणीय गर्तों से अरावली जल-विभाजक को पार करते हुए उन पूर्वी मैदानों तक पहुंचता है जहां नदियों का जाल अपेक्षाकृत अधिक विकसित है।

कारण और परिणाम

स्थलरूपप्रक्रिया और परिणाम
पर्वतीय उच्चावचहिम-पोषित और वर्षा-पोषित अपवाह को नियंत्रित करता है
मैदाननया और पुराना जलोढ़ संचित करते हैं
पठारी सतहखनिज और कठोर चट्टानें उजागर करती है
मरुस्थलपवन-कार्य, लवणीय गर्त और जल-अभाव दिखाता है
तटसमुद्री निमज्जन या उन्मज्जन के प्रभाव दिखाते हैं
द्वीपसमुद्रतल पर्वत, ज्वालामुखीय क्रिया और प्रवाल उत्पत्ति का इतिहास बताते हैं

यह अनुप्रस्थ काट राष्ट्रीय विभाजन को केवल याद किए हुए नामों की सूची नहीं रहने देता। इससे समझ आता है कि मानचित्र पर पर्वत, मैदान और मरुस्थल साथ हों तो उच्चावच, अपवाह और मिट्टी को जोड़कर पढ़ना चाहिए। आरएएस के उत्तर में इसे प्रक्रियाओं के मानचित्र की तरह लिखें: पर्वत-निर्माण उच्चावच और अवसाद देता है, मैदान जलोढ़ संचित करते हैं, पठार पुरानी चट्टानें उजागर करते हैं, मरुस्थल शुष्कता दिखाते हैं, तट समुद्र-स्तर और अवसाद की दशाओं के अनुसार बदलते हैं, और द्वीप समुद्रतल पर्वत, ज्वालामुखीय क्रिया या प्रवाल से उत्पन्न होते हैं।

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संभावित प्रश्न

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1MCQभारत के छह बड़े भौगोलिक भागों का सबसे सही समूह कौन सा है?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aपर्वत, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, मरुस्थल, तटीय मैदान और द्वीपसही
  2. Bपर्वत, काली मिट्टी, मैंग्रोव, खनिज, नदियां और नगर
  3. Cहिमालय, दक्कन, राजस्थान, गुजरात, बंगाल और असम
  4. Dवन, वर्षा क्षेत्र, बंदरगाह, दर्रे, डेल्टा और अभयारण्य

व्याख्या

विकल्प क भारत की भौतिक विशेषताओं के लिए उपयोग होने वाले भौगोलिक विभाजन ढांचे से मेल खाता है। बाकी विकल्प मिट्टी, राज्य, संसाधन या पारिस्थितिकी लेबल मिला देते हैं, इसलिए वे बड़े स्थलरूपों का वर्गीकरण नहीं हैं।

~50 शब्द · 1 अंक