अनूपोदय — गीतगोविन्द पर अनूपसिंह की संस्कृत टीका
मुख्य तथ्य
- अनूपोदय बीकानेर के राठौड़ शासक महाराजा अनूपसिंह द्वारा जयदेव कृत गीतगोविन्द पर लिखी गई संस्कृत टीका है।
- यह कृति राजस्थान की दरबारी संस्कृत परम्परा और कृष्ण-भक्ति साहित्य, दोनों से जुड़ी मानी जाती है।
- महाराजा अनूपसिंह ने अनूपोदय के अतिरिक्त अनूपविवेक, कामप्रबोध और श्राद्धप्रयोग चिन्तामणि जैसे संस्कृत ग्रंथ भी लिखे।
- अनूपसिंह ने दक्षिण भारत प्रवास के समय दुर्लभ हस्तलिखित पाण्डुलिपियों को सुरक्षित कर बीकानेर के अनूप संस्कृत पुस्तकालय में संगृहीत कराया।
- अनूपोदय बीकानेर की दरबारी संस्कृत परम्परा को व्यापक कृष्ण-भक्ति धारा से जोड़ने वाली कृति है।
मुख्य बिंदु
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अनूपोदय बीकानेर के राठौड़ शासक महाराजा अनूपसिंह द्वारा जयदेव कृत गीतगोविन्द पर लिखी गई संस्कृत टीका है।
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यह कृति राजस्थान की दरबारी संस्कृत परम्परा और कृष्ण-भक्ति साहित्य, दोनों से जुड़ी मानी जाती है।
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महाराजा अनूपसिंह ने अनूपोदय के अतिरिक्त अनूपविवेक, कामप्रबोध और श्राद्धप्रयोग चिन्तामणि जैसे संस्कृत ग्रंथ भी लिखे।
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अनूपसिंह ने दक्षिण भारत प्रवास के समय दुर्लभ हस्तलिखित पाण्डुलिपियों को सुरक्षित कर बीकानेर के अनूप संस्कृत पुस्तकालय में संगृहीत कराया।
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अनूपोदय बीकानेर की दरबारी संस्कृत परम्परा को व्यापक कृष्ण-भक्ति धारा से जोड़ने वाली कृति है।
अनूपोदय क्या है और यह गीतगोविन्द से कैसे जुड़ा है?
अनूपोदय क्या है और यह गीतगोविन्द से कैसे जुड़ा है?
अनूपोदय बीकानेर के राठौड़ शासक महाराजा अनूपसिंह द्वारा जयदेव कृत गीतगोविन्द पर लिखी गई संस्कृत टीका है, इसलिए यह राजस्थान की दरबारी संस्कृत परम्परा और कृष्ण-भक्ति साहित्य, दोनों से जुड़ी कृति है। अनूपोदय बीकानेर के राठौड़ शासक महाराजा अनूपसिंह (शासनकाल १६६९-१६९८ ई.) द्वारा रचित संस्कृत टीका ग्रंथ है, जो जयदेव कृत गीतगोविन्द पर लिखा गया है। भारत की जनगणना २०११ के प्राथमिक जनगणना सार के अनुसार बीकानेर जिले की कुल जनसंख्या २३,६३,९३७ थी।
महाराजा अनूपसिंह
- दक्षिण अभियान: १६७० ई. में मुगल सम्राट औरंगजेब ने अनूपसिंह को मराठों के विरुद्ध भेजा; दक्षिण अभियानों और विशेष रूप से गोलकुंडा अभियान में उनके पराक्रम के कारण बाद में अनूपसिंह को 'महाराजा' तथा 'माही मरातिब' की उपाधियाँ मिलीं।
- संस्कृत ग्रंथ: विद्या-अनुरागी इस नरेश ने अनूपोदय के अतिरिक्त अनूपविवेक, कामप्रबोध एवं श्राद्धप्रयोग चिन्तामणि जैसे संस्कृत ग्रंथ भी लिखे।
- हस्तलिखित पाण्डुलिपियों का संरक्षण: दक्षिण भारत में प्रवास के समय उन्होंने अनेक दुर्लभ हस्तलिखित पाण्डुलिपियों को विनाश से सुरक्षित किया तथा उन्हें क्रय करके बीकानेर के अनूप संस्कृत पुस्तकालय में संगृहीत किया।
साहित्यिक महत्त्व
- एक वैष्णव भक्ति-काव्य पर रचित टीका होने के कारण अनूपोदय बीकानेर की दरबारी संस्कृत परम्परा को व्यापक कृष्ण-भक्ति धारा से जोड़ता है।
- साथ ही यह कृति उत्तर-मुगलकाल में दक्षिणी विद्या के राजपूताना में संक्रमण का प्रलेखन भी प्रस्तुत करती है।
- परीक्षा की दृष्टि से अनूपोदय को याद रखते समय तीन बातें साथ रखनी चाहिए: लेखक महाराजा अनूपसिंह, आधार-ग्रंथ जयदेव कृत गीतगोविन्द, और सांस्कृतिक सन्दर्भ बीकानेर की संस्कृत विद्या-परम्परा।
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