देवीसिंह: बूंदी के संस्थापक हाड़ा चौहान
मुख्य तथ्य
- देवीसिंह, जिन्हें राव देवा भी कहा जाता है, चौहान वंश की हाड़ा शाखा के संस्थापक शासक माने जाते हैं।
- लगभग १२४१ ईस्वी में देवीसिंह ने स्थानीय मीणा सरदारों को हराकर दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बूंदी राज्य की नींव डाली।
- बूंदी राज्य जिस क्षेत्र में स्थापित हुआ, उसे आगे चलकर हाड़ौती कहा गया।
- देवीसिंह का महत्व बूंदी राज्य और हाड़ा सत्ता की शुरुआत से जुड़ता है।
- देवीसिंह के वंशजों ने राज्य का विस्तार पूर्व की ओर किया, जिसमें चम्बल नदी पार करना और कोटिया भीलों पर विजय महत्त्वपूर्ण रही।
मुख्य बिंदु
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देवीसिंह, जिन्हें राव देवा भी कहा जाता है, चौहान वंश की हाड़ा शाखा के संस्थापक शासक माने जाते हैं।
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लगभग १२४१ ईस्वी में देवीसिंह ने स्थानीय मीणा सरदारों को हराकर दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बूंदी राज्य की नींव डाली।
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बूंदी राज्य जिस क्षेत्र में स्थापित हुआ, उसे आगे चलकर हाड़ौती कहा गया।
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देवीसिंह का महत्व बूंदी राज्य और हाड़ा सत्ता की शुरुआत से जुड़ता है।
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देवीसिंह के वंशजों ने राज्य का विस्तार पूर्व की ओर किया, जिसमें चम्बल नदी पार करना और कोटिया भीलों पर विजय महत्त्वपूर्ण रही।
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अकबर के काल में कोटा और बूंदी अलग-अलग मनसबदारी राज्य बने।
बूंदी राज्य के संस्थापक हाड़ा चौहान देवीसिंह कौन थे?
देवीसिंह, जिन्हें राव देवा भी कहा जाता है, चौहान वंश की हाड़ा शाखा के वे संस्थापक शासक माने जाते हैं जिन्होंने लगभग १२४१ ईस्वी में स्थानीय मीणा सरदारों को हराकर दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बूंदी राज्य की नींव डाली। इस क्षेत्र को आगे चलकर हाड़ौती कहा गया, इसलिए देवीसिंह का महत्व केवल एक स्थानीय विजय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बूंदी और हाड़ा सत्ता की शुरुआत से जुड़ता है। जनगणना २०११ की बूंदी जिला जनगणना पुस्तिका के अनुसार बूंदी जिले में ८७३ गाँव दर्ज थे।
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+देवीसिंह चौहान वंश की हाड़ा शाखा के संस्थापक माने जाते हैं। लगभग १२४१ ईस्वी में उन्होंने दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के उस क्षेत्र पर स्थानीय मीणा सरदारों को हराकर बूंदी राज्य की नींव डाली, जिसे आगे चलकर हाड़ौती कहा गया। परीक्षा में इस तथ्य को बूंदी राज्य, हाड़ा चौहान और हाड़ौती क्षेत्र के उदय को जोड़कर याद रखना चाहिए, क्योंकि यही संबंध बाद में कोटा तक हाड़ा प्रभाव के विस्तार को समझाता है।
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+#### स्थापना का संदर्भ
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+- संस्थापक: देवीसिंह चौहान वंश की हाड़ा शाखा के संस्थापक माने जाते हैं।
+- राज्य: बूंदी राज्य।
+- समय और क्षेत्र: लगभग १२४१ ईस्वी में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान का वह क्षेत्र, जिसे आगे चलकर हाड़ौती कहा गया।
+- तात्कालिक विजय: स्थानीय मीणा सरदारों को हराकर बूंदी राज्य की नींव डाली।
+- राजनीतिक रिक्तता: तुर्क आक्रमणों ने राजस्थान में पहले की चौहान सत्ता को कमजोर कर दिया था, और इसी राजनीतिक रिक्तता का लाभ उठाकर हाड़ा शाखा यहाँ उभरी।
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+#### पूर्व की ओर विस्तार
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+उनके वंशजों ने राज्य का विस्तार पूर्व की ओर किया। इस विस्तार में चम्बल नदी का पार करना और कोटिया भीलों पर विजय महत्त्वपूर्ण रही, क्योंकि इसी से बूंदी से कोटा की दिशा में हाड़ा सत्ता के लिए रास्ता खुला।
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+| वर्ष | शासक | कार्य | परिणाम |
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+| १२७४ ईस्वी | उनके पौत्र जैतसिंह | चम्बल नदी को पार कर कोटिया भीलों को परास्त किया तथा अकेलगढ़ और मुकुन्दरानाल में हाड़ा सत्ता स्थापित की | कोटा तक का मार्ग खुला |
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+#### अकबर के काल की व्यवस्था
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+- राज्य व्यवस्था: अकबर के काल में कोटा और बूंदी अलग-अलग मनसबदारी राज्य बने।
+- शासकों की भूमिका: उनके शासक मुगल दरबार की सेवा करते हुए मन्दिर निर्माण तथा दान-पुण्य में प्रवृत्त रहे।
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+इसलिए बूंदी के संदर्भ में देवीसिंह को हाड़ा चौहानों की सत्ता-स्थापना, हाड़ौती नामकरण और बाद के बूंदी-कोटा राजनीतिक विकास की आरंभिक कड़ी के रूप में पढ़ना चाहिए।
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