मुख्य तथ्य

  • कामरान मुगल सम्राट बाबर का पुत्र और हुमायूँ का छोटा भाई था, जिसके अधिकार में सोलहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में काबुल का शासन था।
  • कामरान ने अपनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा के कारण १५३४ ई. में भटनेर दुर्ग पर आक्रमण किया।
  • १५३४ ई. के भटनेर अभियान में कामरान का प्रतिद्वंद्वी बीकानेर के राव जैतसी थे, जिनका शासनकाल १५२६-१५४१ ई. रहा।
  • राव जैतसी ने भटनेर के संघर्ष में कामरान को पराजित कर मुगल विस्तार के विरुद्ध राजस्थानी प्रतिरोध का उदाहरण प्रस्तुत किया।
  • इस युद्ध का सजीव वर्णन बीठू सूजा की राजस्थानी रचना 'राव जैतसी रो छन्द' में मिलता है।

मुख्य बिंदु

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    कामरान मुगल सम्राट बाबर का पुत्र और हुमायूँ का छोटा भाई था, जिसके अधिकार में सोलहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में काबुल का शासन था।

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    कामरान ने अपनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा के कारण १५३४ ई. में भटनेर दुर्ग पर आक्रमण किया।

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    १५३४ ई. के भटनेर अभियान में कामरान का प्रतिद्वंद्वी बीकानेर के राव जैतसी थे, जिनका शासनकाल १५२६-१५४१ ई. रहा।

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    राव जैतसी ने भटनेर के संघर्ष में कामरान को पराजित कर मुगल विस्तार के विरुद्ध राजस्थानी प्रतिरोध का उदाहरण प्रस्तुत किया।

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    इस युद्ध का सजीव वर्णन बीठू सूजा की राजस्थानी रचना 'राव जैतसी रो छन्द' में मिलता है।

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    जैतसी की कामरान पर पूर्व विजय बाद में भी मुगल विस्तार के विरुद्ध राजस्थानी प्रतिरोध का स्मरणीय अध्याय मानी गई।

कामरान ने १५३४ ई. में भटनेर पर आक्रमण क्यों किया और राव जैतसी ने उसे कैसे हराया?

कामरान ने अपनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा के कारण १५३४ ई. में भटनेर दुर्ग पर आक्रमण किया, लेकिन बीकानेर के राव जैतसी ने उसे पराजित कर मुगल विस्तार के विरुद्ध राजस्थानी प्रतिरोध का उदाहरण पेश किया। कामरान की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं के कारण उसका टकराव बीकानेर के राठौड़ों से हुआ। जनगणना २०११ के राजस्थान प्राथमिक जनगणना सार के अनुसार बीकानेर जिले की जनसंख्या २३,६३,९३७ थी; इसलिए यह प्रसंग केवल एक दुर्ग-युद्ध नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी राजस्थान की उस ऐतिहासिक पट्टी से जुड़ा है जहाँ बीकानेर की राजनीतिक पहचान बनी।

कामरान: पृष्ठभूमि

पक्ष विवरण
वंश कामरान मुगल सम्राट बाबर का पुत्र तथा हुमायूँ का छोटा भाई था।
शासन सोलहवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में काबुल का शासन उसके अधिकार में था।

१५३४ ई. भटनेर अभियान

  • आक्रमण: १५३४ ई. में उसने भटनेर दुर्ग पर आक्रमण किया।
  • प्रतिद्वंद्वी: बीकानेर के राव जैतसी (शासनकाल १५२६-१५४१ ई.)।
  • परिणाम: राव जैतसी ने इस संघर्ष में उसे पराजित कर दिया।

साहित्यिक वर्णन

  • इस युद्ध का सजीव वर्णन बीठू सूजा की राजस्थानी रचना 'राव जैतसी रो छन्द' में मिलता है।
  • यह रचना जैतसी की रणनीति तथा बीकानेर के उन वीरों के साहस का स्मरण कराती है जो दुर्ग की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

बाद की घटना और महत्त्व

  • जैतसी स्वयं १५४१ ई. में मारवाड़ के मालदेव के विरुद्ध साहेबा के युद्ध में काम आये।
  • फिर भी कामरान पर उनकी पूर्व विजय मुगल विस्तार के विरुद्ध राजस्थानी प्रतिरोध का स्मरणीय अध्याय बनी रही।