मुख्य तथ्य

  • डूँगरपुर गुहिल आसकरण वागड़-डूँगरपुर का शासक था, जिसने पृथ्वीराज का उत्तराधिकारी बनकर १५४९ से १५८० ई. तक शासन किया।
  • डूँगरपुर के आसकरण ने १५७७ ई. में औपचारिक रूप से मुगल अधीनता स्वीकार की।
  • १५८० ई. में बाँसवाड़ा के सैसमल ने डूँगरपुर पर चढ़ाई कर उसके इलाके को नुकसान पहुँचाया।

मुख्य बिंदु

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    डूँगरपुर गुहिल आसकरण वागड़-डूँगरपुर का शासक था, जिसने पृथ्वीराज का उत्तराधिकारी बनकर १५४९ से १५८० ई. तक शासन किया।

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    डूँगरपुर के आसकरण ने १५७७ ई. में औपचारिक रूप से मुगल अधीनता स्वीकार की।

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    मुगल अधीनता स्वीकार करने के अगले वर्ष मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने डूँगरपुर पर आक्रमण किया।

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    डूँगरपुर के आसकरण ने खुले युद्ध से दूरी रखी और स्वयं मुगल सेना के भीतर बना रहा।

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    १५८० ई. में बाँसवाड़ा के सैसमल ने डूँगरपुर पर चढ़ाई कर उसके इलाके को नुकसान पहुँचाया।

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    आमेर कछवाहा आसकरण रत्नसिंह का छोटा भाई था, जिसने रत्नसिंह को विष देकर थोड़े समय के लिए गद्दी हथियाई और बाद में भारमल ने उसे हटा दिया।

डूँगरपुर गुहिल आसकरण और आमेर कछवाहा आसकरण में फर्क क्या है?

डूँगरपुर गुहिल आसकरण वागड़-डूँगरपुर का शासक था, जिसने १५४९ से १५८० ई. तक राज्य किया और १५७७ ई. में मुगल अधीनता स्वीकार की, जबकि आमेर कछवाहा आसकरण रत्नसिंह का छोटा भाई था, जिसने रत्नसिंह को विष देकर थोड़े समय के लिए आमेर की गद्दी हथिया ली और फिर भारमल ने उसे हटा दिया।

मध्यकालीन राजस्थान के इतिहास में आसकरण नाम के दो अलग-अलग शासक मिलते हैं, और परीक्षार्थी के लिए दोनों को अलग-अलग समझना ज़रूरी है। जनगणना २०११ के डूँगरपुर जिला जनगणना हैंडबुक के अनुसार डूँगरपुर जिले की जनसंख्या १३,८८,५५२ थी; इसलिए डूँगरपुर/वागड़ और आमेर/जयपुर को अलग भौगोलिक स्मृति में रखना परीक्षा के लिए उपयोगी रहता है।

डूँगरपुर गुहिल आसकरण

  • पहचान: पहला आसकरण डूँगरपुर के वागड़ गुहिल वंश का शासक था।
  • उत्तराधिकार: पृथ्वीराज का उत्तराधिकारी बनकर १५४९ से १५८० ई. तक राज्य करता रहा।
  • मुगल अधीनता: १५७७ ई. में इसने औपचारिक रूप से मुगल अधीनता स्वीकार कर ली।
  • मेवाड़ की प्रतिक्रिया: ठीक अगले वर्ष मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने इस समर्पण के बदले में डूँगरपुर पर आक्रमण किया।
  • युद्ध में स्थिति: आसकरण स्वयं मुगल सेना के भीतर ही बना रहा और खुले युद्ध से दूर रहा।
  • बाँसवाड़ा का आक्रमण: १५८० ई. में बाँसवाड़ा के सैसमल ने डूँगरपुर पर चढ़ाई कर उसके इलाके को नुकसान पहुँचाया।

आमेर कछवाहा आसकरण

  • पहचान: दूसरा आसकरण आमेर का कछवाहा राजकुमार था।
  • रत्नसिंह से संबंध: यह रत्नसिंह (१५३६–१५४६ ई.) का छोटा भाई था।
  • गद्दी हथियाना: इसने रत्नसिंह को विष देकर मार डाला और कुछ समय के लिए गद्दी हथिया ली।
  • पदच्युति: जल्द ही भारमल द्वारा पदच्युत कर दिया गया, जो १५४७ ई. से आमेर का शासक बना।

परीक्षा में गलती अक्सर नाम से होती है, इसलिए क्रम साफ रखें: डूँगरपुर वाला आसकरण वागड़ गुहिल शासक और मुगल अधीनता से जुड़ा है; आमेर वाला आसकरण कछवाहा राजकुमार, रत्नसिंह की हत्या, थोड़े समय की गद्दी और भारमल द्वारा पदच्युति से जुड़ा है।