राजस्थान की जलवायु विशेषताएँ एवं वर्गीकरण
मुख्य तथ्य
- राजस्थान में वर्षा के आधार पर 4 जलवायु क्षेत्र हैं: पश्चिमी मरुस्थल (<10 सेमी), अर्ध-शुष्क (10–50 सेमी), उप-आर्द्र (50–100 सेमी), आर्द्र (>100 सेमी)।
- कोपेन वर्गीकरण राजस्थान को 4 जलवायु क्षेत्रों में रखता है: ए-डब्ल्यू (उष्णकटिबंधीय सवाना
- माउंट आबू में वार्षिक वर्षा ~150 सेमी (राज्य में सर्वाधिक); जैसलमेर में ~10 सेमी (जिला मुख्यालयों में भारत में सबसे कम)।
- राज्य की औसत वार्षिक वर्षा ~57 सेमी। 75–80% वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून काल (जुलाई-सितंबर) में।
- फलोदी (जोधपुर जिला) ने 19 मई 2016 को 51°C तापमान दर्ज किया — भारत का अब तक का सर्वाधिक तापमान।
मुख्य बिंदु
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राजस्थान में वर्षा के आधार पर 4 जलवायु क्षेत्र हैं: पश्चिमी मरुस्थल (<10 सेमी), अर्ध-शुष्क (10–50 सेमी), उप-आर्द्र (50–100 सेमी), आर्द्र (>100 सेमी)।
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कोपेन वर्गीकरण राजस्थान को 4 जलवायु क्षेत्रों में रखता है: ए-डब्ल्यू (उष्णकटिबंधीय सवाना — दक्षिण-पूर्व), बी-एस-एच (गर्म अर्ध-शुष्क स्टेपी), बी-डब्ल्यू-एच-डब्ल्यू (गर्म मरुस्थल) और सी-डब्ल्यू-जी (आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय — पूर्व)।
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माउंट आबू में वार्षिक वर्षा ~150 सेमी (राज्य में सर्वाधिक); जैसलमेर में ~10 सेमी (जिला मुख्यालयों में भारत में सबसे कम)।
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राज्य की औसत वार्षिक वर्षा ~57 सेमी। 75–80% वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून काल (जुलाई-सितंबर) में।
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फलोदी (जोधपुर जिला) ने 19 मई 2016 को 51°C तापमान दर्ज किया — भारत का अब तक का सर्वाधिक तापमान।
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पश्चिमी विक्षोभ राजस्थान में शीतकालीन वर्षा (मावठ) लाते हैं, जो रबी फसलों (गेहूँ, सरसों) के लिए महत्त्वपूर्ण है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून दो शाखाओं से: अरब सागर शाखा (गुजरात से, कमजोर) और बंगाल की खाड़ी शाखा (विंध्य से, प्रबल)।
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फतेहपुर-सीकर क्षेत्र सर्दियों में सबसे ठंडा; चूरू एक ही वर्ष में गर्मी और सर्दी दोनों में चरम तापमान दर्ज करता है।
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राजस्थान में 5 ऋतुएँ: ग्रीष्म, पूर्व-मानसून, दक्षिण-पश्चिम मानसून, उत्तर-पूर्व मानसून (पश्चात्), शीत।
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राजस्थान में लगभग हर 10 वर्ष में 3 बार अकाल; पश्चिमी जिलों में 6–8 बार। अल-नीनो वर्षों में अकाल का प्रबल सहसंबंध।
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अरावली पर्वतमाला जलवायु विभाजक: पूर्वी (पवनमुखी) भाग में 60–100 सेमी; पश्चिमी (अनुवात) भाग में <50 सेमी।
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जलवायु परिवर्तन: 50 वर्षों में राजस्थान में औसत तापमान +0.5°C वृद्धि, लू की बढ़ती आवृत्ति, मानसून आगमन में बदलाव।
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लू — मई-जून में पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली गर्म, शुष्क हवा; तापमान 45–50°C; स्वास्थ्य व फसलों को नुकसान।
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राजस्थान में वर्षा की वार्षिक परिवर्तनशीलता अत्यधिक: मरुस्थलीय क्षेत्र में CV >40% (भारत के समग्र ~20% की तुलना में)।
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मानसून आगमन: दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में जून के अंत तक; उत्तर-पश्चिम में जुलाई मध्य तक; सितंबर में उत्तर-पश्चिम से वापसी शुरू।
परिचय और पाठ्यक्रम दायरा
इस अध्याय का दायरा आरपीएससी मुख्य परीक्षा में राजस्थान की जलवायु विशेषताओं, जलवायु वर्गीकरण और उन्हें नियंत्रित करने वाले भौगोलिक कारकों को समझाने तक सीमित है।
आरपीएससी २०२६ के पाठ्यक्रम में प्रश्नपत्र द्वितीय, इकाई ३ (पृथ्वी विज्ञान) के अंतर्गत भाग सी में राजस्थान की जलवायु को सम्मिलित किया गया है। इस विषय में तीन स्तरीय ज्ञान अपेक्षित है: जलवायु विशेषताएँ (तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पवन), जलवायु वर्गीकरण (कोपेन पद्धति का राजस्थान पर अनुप्रयोग, और क्षेत्रीय क्षेत्र-आधारित भारतीय वर्गीकरण), और नियंत्रणकारी कारक (अक्षांश, अरावली अवरोध, समुद्र से दूरी, मानसून पथ)। परीक्षक का ध्यान हमेशा राजस्थान-केन्द्रित रहता है - अतिशुष्क थार से लेकर दक्षिण-पूर्व के उप-आर्द्र क्षेत्र तक राज्य के चरम जलवायवी विरोधाभास, इसे भारत के सर्वाधिक जलवायवी विविध राज्यों में से एक बनाते हैं।
स्तर ३ पीवाईक्यू स्थिति (५ में से २ परीक्षाएँ, औसत २.० अंक/वर्ष) बताती है कि यह विषय हर बार तो नहीं, पर लगातार परीक्षा में आता रहा है। आरपीएससी ने संकीर्ण ५-अंकीय प्रश्न (लू की परिभाषा; सबसे ठंडे/गर्म स्थान का नाम) और विश्लेषणात्मक १०-अंकीय प्रश्न (राजस्थान की जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारक; मानसून विशेषताएँ) दोनों पूछे हैं। २०२६ पाठ्यक्रम संशोधन जलवायु परिवर्तन को एक उप-विषय के रूप में महत्व देता है, जिससे इसके प्रमुखता से पूछे जाने की संभावना है।
विषय-क्षेत्र की सीमाएँ: विषय #८३ (भूआकृति) भूमि-स्वरूप का आधार प्रदान करता है - अरावली, थार और मैदान जो वर्षा वितरण की व्याख्या करते हैं। विषय #८५ (प्राकृतिक वनस्पति) जलवायु क्षेत्रों द्वारा सीधे निर्धारित होती है - वनस्पति प्रश्नों के उत्तर के लिए इस विषय की समझ आवश्यक है। विषय #८७ (कृषि) मानसून समय, पश्चिमी विक्षोभ और सूखे की आवृत्ति पर भारी रूप से निर्भर करती है। यहाँ भूआकृति या वनस्पति का विस्तृत वर्णन न करें; बस उनसे जोड़कर संदर्भ दें।
इस अध्याय में इन विषयों को शामिल किया गया है: जलवायु नियंत्रण, कोपेन वर्गीकरण, क्षेत्रीय जलवायु क्षेत्र, मौसमी प्रतिरूप, तापमान और वर्षा वितरण, पश्चिमी विक्षोभ, सूखा और अकाल, और राजस्थान पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M पश्चिमी विक्षोभ क्या हैं? राजस्थान के लिए उनके उद्गम और कृषि महत्त्व का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर से उत्पन्न अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात हैं, जो मध्य-अक्षांश पछुआ जेट धाराओं द्वारा पूर्व की ओर बढ़ते हैं। ये उत्तरी राजस्थान — गंगानगर, सीकर, झुंझुनूं — में शीतकालीन वर्षा (मावठ, 1–5 सेमी प्रति घटना, प्रति मौसम 4–8 घटनाएँ) लाते हैं। यह नमी रबी फसलों — गेहूँ, सरसों, चना — के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
~50 शब्द • 5 अंक
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