राजस्थान की भू-आकृतियाँ, नदियाँ, झीलें
मुख्य तथ्य
- राजस्थान का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किमी (भारत के भू-भाग का 10.41%) है — भारत का सबसे बड़ा राज्य।
- चार भू-आकृतिक विभाग: पश्चिमी मरुस्थलीय मैदान (61.11%), अरावली श्रृंखला (9.3%), पूर्वी मैदान (23.0%), दक्षिण-पूर्वी पठार/हाड़ौती (6.6%)।
- अरावली श्रृंखला — विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखला (~250 करोड़ वर्ष पुरानी), राजस्थान में 692 किमी; सर्वोच्च शिखर गुरु शिखर (1,722 मीटर)।
- थार मरुस्थल राजस्थान के ~61% क्षेत्र में फैला है; वार्षिक वर्षा 25 सेमी से कम; बालूका स्तूप (धोरे) प्रमुख भू-आकृति।
- लूनी — पश्चिमी राजस्थान की सबसे लंबी नदी (495 किमी), बालोत्रा के नीचे खारी हो जाती है।
मुख्य बिंदु
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राजस्थान का क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किमी (भारत के भू-भाग का 10.41%) है — भारत का सबसे बड़ा राज्य।
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चार भू-आकृतिक विभाग: पश्चिमी मरुस्थलीय मैदान (61.11%), अरावली श्रृंखला (9.3%), पूर्वी मैदान (23.0%), दक्षिण-पूर्वी पठार/हाड़ौती (6.6%)।
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अरावली श्रृंखला — विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखला (~250 करोड़ वर्ष पुरानी), राजस्थान में 692 किमी; सर्वोच्च शिखर गुरु शिखर (1,722 मीटर)।
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थार मरुस्थल राजस्थान के ~61% क्षेत्र में फैला है; वार्षिक वर्षा 25 सेमी से कम; बालूका स्तूप (धोरे) प्रमुख भू-आकृति।
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लूनी — पश्चिमी राजस्थान की सबसे लंबी नदी (495 किमी), बालोत्रा के नीचे खारी हो जाती है।
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चंबल — राजस्थान की सबसे लंबी नदी (966 किमी कुल), एकमात्र बारहमासी नदी जो बीहड़ों के लिए प्रसिद्ध है।
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बनास — राजस्थान की सबसे लंबी नदी जो पूर्णतः राजस्थान में बहती है (480 किमी)।
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आंतरिक प्रवाह राजस्थान के ~60% क्षेत्र में फैला है — नदियाँ सागर तक नहीं पहुँचती।
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साम्भर झील — भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील (240 वर्ग किमी); रामसर स्थल।
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जयसमंद झील — एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील (ऐतिहासिक रूप से); 1685-91 में महाराणा जयसिंह द्वारा निर्मित; ~87 वर्ग किमी।
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इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) — हरिके बैराज से 649 किमी मुख्य नहर; विश्व की सबसे बड़ी नहर सिंचाई परियोजना।
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चंबल घाटी परियोजना — तीन बाँध: गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर; कुल स्थापित क्षमता ~386 मेगावाट।
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अरावली मुख्य जलविभाजक है: पश्चिम की नदियाँ अरब सागर/आंतरिक प्रवाह में, पूर्व की नदियाँ बंगाल की खाड़ी में जाती हैं।
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पुष्कर झील — भारत में ब्रह्मा जी से जुड़ी एकमात्र झील; मीठे पानी की; अजमेर जिले में।
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नक्की झील — राजस्थान की सबसे ऊँची झील (~1,200 मीटर); माउंट आबू, सिरोही।
परिचय एवं पाठ्यक्रम
आरपीएससी के लिए यह अध्याय राजस्थान के भू-आकृतिक विभागों, नदी-तंत्रों और प्रमुख झीलों को एक साथ पढ़ने वाला भूगोल विषय है। आरपीएससी के आधिकारिक मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में पेपर २ की इकाई ३ के राजस्थान भाग में पर्वत, पठार, मैदान, नदियाँ और झीलें एक ही पाठ्य-बिंदु में रखी गई हैं।
आरपीएससी २०२६ के पेपर २, इकाई ३ (पृथ्वी विज्ञान/भूगोल) के पाठ्यक्रम में यह विषय भाग सी के अंतर्गत सम्मिलित है। इसमें तीन परस्पर संबद्ध उप-विषय शामिल हैं: राजस्थान के चार भौगोलिक विभाग (भू-आकृतियाँ), नदी-तंत्र एवं उनके अपवाह बेसिन, तथा प्रमुख झीलें (प्राकृतिक एवं कृत्रिम)। तीनों को पढ़ना आवश्यक है क्योंकि आरपीएससी अक्सर ऐसे प्रश्न पूछता है जो उप-विषयों की सीमाएँ पार करते हैं — उदाहरण के लिए, अरावली श्रृंखला को नदी-तंत्रों के बीच जलविभाजक के रूप में जोड़ना।
पिछले वर्षों के प्रश्न स्तर ३ वर्गीकरण (५ में से ४ परीक्षाएँ, औसत २.८ अंक) यह दर्शाता है कि यह विषय नियमित रूप से परंतु प्रमुखता से नहीं पूछा जाता: आरपीएससी सामान्यतः प्रति परीक्षा एक ५-अंकीय तथ्यात्मक प्रश्न पूछता है, न कि पूरा १०-अंकीय विश्लेषणात्मक प्रश्न। हालाँकि, २०२६ के संशोधित पाठ्यक्रम में भौगोलिक आँकड़ों पर अतिरिक्त बल दिया गया है, जिससे २०२६ में १०-अंकीय प्रश्न की संभावना अधिक हो गई है। जो विद्यार्थी केवल नदियों और झीलों के "नाम" जानते हैं, वे ३-४/५ अंक पाते हैं; जो लंबाई, सहायक नदियाँ, अपवाह बेसिन विभाजन, बाँध विशेषताएँ और झील माप जानते हैं, वे पूरे ५/५ या १०-अंकीय उत्तर में श्रेष्ठता प्राप्त करते हैं।
आसन्न विषय महत्त्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करते हैं: विषय #८४ (जलवायु) बताता है कि पश्चिमी राजस्थान की नदियाँ मौसमी क्यों हैं; विषय #८५ (वनस्पति) जलसंभर पारिस्थितिकी से जोड़ता है; विषय #८६ (मृदा) नदी के मैदानों में जलोढ़ निक्षेपण से संबंधित है; विषय #८८ (खनिज) अरावली भू-आकृतियों की भूगर्भीय पृष्ठभूमि और वहाँ विशेष खनिजों की उपस्थिति को स्पष्ट करता है।
यह अध्याय निम्नलिखित को समाहित करता है: सटीक क्षेत्रफल प्रतिशत और भू-आकृति प्रकारों सहित चार भौगोलिक क्षेत्र; अपवाह बेसिन (अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, अंतर्देशीय) द्वारा पूर्ण नदी वर्गीकरण; उद्गम, लंबाई, सहायक नदियों और संबंधित परियोजनाओं सहित प्रमुख नदियाँ; तथा विमाओं, स्थानों और महत्त्व सहित सभी प्रमुख झीलें।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M राजस्थान के तीन अपवाह विभाजनों के नाम बताइए और प्रत्येक में एक प्रमुख नदी तंत्र का उल्लेख कीजिए।
आदर्श उत्तर
राजस्थान में तीन अपवाह विभाजन हैं: (1) बंगाल की खाड़ी — चम्बल-बनास तंत्र (पूर्वी राजस्थान); (2) अरब सागर — लूनी नदी तंत्र (दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान); (3) आंतरिक अपवाह — घग्गर और कांतली नदियाँ (उत्तरी राजस्थान, मरुस्थल में विलीन)। अरावली श्रेणी इन तीनों तंत्रों को अलग करने वाला मुख्य जलविभाजक है।
~50 शब्द • 5 अंक
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