भारत का अपवाह प्रतिरूप एवं नदियाँ
मुख्य तथ्य
- गंगा — भारत की सबसे लंबी नदी — लंबाई: 2,525 किमी; सबसे बड़ा बेसिन — 8.6 लाख वर्ग किमी (भारत का 26%)
- सिंधु — तंत्र की सबसे लंबी नदी — पाकिस्तान की राष्ट्रीय नदी, किंतु तिब्बत (मानसरोवर झील के पास) में उद्गम
- ब्रह्मपुत्र — विश्व रिकॉर्ड — तिब्बत में सांगपो के रूप में निकलती है; अरुणाचल (दिबांग घाटी) से भारत में प्रवेश
- पूर्ववर्ती अपवाह और हिमालयी महाखड्ड — हिमालयी नदियाँ पर्वतों से भी पुरानी हैं — उठते पहाड़ों को काटती रहीं
- गोदावरी — दक्षिण गंगा — भारत की सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी: 1,465 किमी — नासिक के त्र्यंबकेश्वर से निकलती है; "दक्षिण गंगा" कहलाती है
मुख्य बिंदु
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दो मुख्य अपवाह प्रकार
- हिमालयी नदियाँ — बारहमासी, हिमनद+हिमपात से पोषित, पूर्ववर्ती प्रवाह
- प्रायद्वीपीय नदियाँ — मौसमी/वर्षा-पोषित, अनुवर्ती प्रवाह
- दोनों तंत्र सिंधु-गंगा गर्त द्वारा अलग हैं
- यह वर्गीकरण सभी नदी प्रश्नों का आधार है
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गंगा — भारत की सबसे लंबी नदी
- लंबाई: 2,525 किमी; सबसे बड़ा बेसिन — 8.6 लाख वर्ग किमी (भारत का 26%)
- गंगोत्री हिमनद (गोमुख) से 3,892 मीटर पर उत्तराखंड में निकलती है
- भारत की राष्ट्रीय नदी (2008 में घोषित)
- नमामि गंगे कार्यक्रम: 20,000 करोड़ रुपये
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सिंधु — तंत्र की सबसे लंबी नदी
- पाकिस्तान की राष्ट्रीय नदी, किंतु तिब्बत (मानसरोवर झील के पास) में उद्गम
- भारतीय लद्दाख से गुजरती है; कुल लंबाई 3,180 किमी
- भारत में ~1,114 किमी; सिंधु जल संधि (1960) से विनियमित
- सिंधु गॉर्ज गहराई: ~5,200 मीटर — ग्रैंड कैन्यन से भी गहरा
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ब्रह्मपुत्र — विश्व रिकॉर्ड
- तिब्बत में सांगपो के रूप में निकलती है; अरुणाचल (दिबांग घाटी) से भारत में प्रवेश
- भारत में 918 किमी; बांग्लादेश में जमुना के रूप में प्रवेश
- असम में विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप — माजुली (880 वर्ग किमी)
- वार्षिक बहाव ~585 BCM — एशिया में तीसरा सर्वाधिक
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पूर्ववर्ती अपवाह और हिमालयी महाखड्ड
- हिमालयी नदियाँ पर्वतों से भी पुरानी हैं — उठते पहाड़ों को काटती रहीं
- सिंधु गॉर्ज (5,200 मीटर गहरा) जैसे शानदार महाखड्ड बने
- यालुंग त्सांगपो कैन्यन: 5,382 मीटर — विश्व का सबसे गहरा
- पूर्ववर्ती नदियाँ: सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र
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गोदावरी — दक्षिण गंगा
- भारत की सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी: 1,465 किमी
- नासिक के त्र्यंबकेश्वर से निकलती है; "दक्षिण गंगा" कहलाती है
- 3.13 लाख वर्ग किमी अपवाहित — दूसरा सबसे बड़ा प्रायद्वीपीय बेसिन
- राज्य: महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा
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कृष्णा नदी — PYQ 2023 केंद्र
- लंबाई: 1,400 किमी; महाबलेश्वर (पश्चिमी घाट, महाराष्ट्र) से उद्गम
- PYQ 2023 में 8 सहायक नदियाँ: भीमा, तुंगभद्रा, मालप्रभा, घटप्रभा, कोयना, मूसी, मुनेरु, यर्ला
- तुंगभद्रा सबसे बड़ी सहायक; हम्पी (UNESCO) इसी के तट पर
- नागार्जुनसागर बाँध — भारत के सबसे बड़े बाँधों में से एक
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नर्मदा और ताप्ती — पश्चिमवाहिनी अपवाद
- दोनों भ्रंश घाटियों (ग्रैबेन) से पश्चिम की ओर अरब सागर में बहती हैं
- अन्य प्रायद्वीपीय नदियों के विपरीत जो पूर्व की ओर बहती हैं
- नर्मदा: 1,312 किमी (अमरकंटक, MP से); डेल्टा नहीं — ज्वारनदमुख बनाती है
- ताप्ती: 724 किमी (सतपुड़ा, MP से; सूरत पर सागर में)
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भारत में पाँच अपवाह प्रतिरूप
- द्रुमाकृतिक — वृक्ष जैसा, सर्वाधिक सामान्य; गंगा तंत्र
- जालीनुमा — समकोण पर सहायक नदियाँ; प्रायद्वीपीय नदियाँ
- अरीय — केंद्र से विकिरण; अमरकंटक (नर्मदा, सोन, महानदी)
- केन्द्राभिमुखी — बेसिन की ओर; लोकतक, सांभर झील
- समानांतर — मैदानी; पंजाब नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज)
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कावेरी नदी — दक्षिण भारत का अन्न भंडार
- ब्रह्मगिरि पहाड़ियों (कोडागु, कर्नाटक) से 1,341 मीटर पर उद्गम; 800 किमी लंबी
- प्रमुख सहायक: हेमावती, अर्कावती, शिम्शा, हरंगी, कबीनी; लक्ष्मणतीर्थ (दाईं)
- शिवानसमुद्र जलप्रपात (98 मीटर) — भारत का दूसरा सबसे बड़ा
- कावेरी जल विवाद (कर्नाटक बनाम तमिलनाडु): SC अंतिम आदेश फरवरी 2018
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नदी जोड़ो परियोजना
- राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना: 30 नदी संपर्क (16 प्रायद्वीपीय + 14 हिमालयी)
- उद्देश्य: अधिशेष बेसिन से घाटे वाले क्षेत्रों में जल स्थानांतरण
- अनुमानित लागत: 5.60 लाख करोड़ रुपये
- केन-बेतवा संपर्क — पहला अनुमोदित (2021); 44,605 करोड़; पन्ना टाइगर रिजर्व से गुजरता है
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नदी बेसिन क्षेत्र — मुख्य आँकड़े
- गंगा: 26% | सिंधु: 11.5% | गोदावरी: 9.5% | कृष्णा: 8%
- ब्रह्मपुत्र: 5.9% | महानदी: 4.3% | नर्मदा: 2.9%
- कावेरी: 1.9% | ताप्ती: 1.6%
- भारत का कुल उपयोगी जल: 1,869 अरब घन मीटर वार्षिक बहाव में से ~1,123 अरब घन मीटर
भारत का अपवाह तंत्र क्या है और इसे कैसे पढ़ना चाहिए?
भारत का अपवाह तंत्र हिमालय, सिंधु-गंगा मैदान और प्रायद्वीपीय पठार की ढालों से बना वह नदी-जाल है जो देश के जल, कृषि, बाढ़, डेल्टा और जल-विवादों को समझने की बुनियाद देता है।
अवलोकन और परिमाण
भारत की नदियाँ उसकी सभ्यता की धमनियाँ हैं — कृषि को जीवन देती हैं, १.४ अरब से अधिक लोगों का भरण-पोषण करती हैं, जलविद्युत उत्पन्न करती हैं और प्रतिवर्ष लाखों टन तलछट प्रवाहित करती हैं। देश का नदी-तंत्र उसकी अनूठी भू-आकृति से आकार पाता है: उत्तर में हिमालय और दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार दो मूलतः भिन्न अपवाह प्रतिमान बनाते हैं, जिन्हें सिंधु-गंगा गर्त अलग करता है।
केंद्रीय जल आयोग के बेसिन वर्गीकरण के अनुसार भारत को २२ नदी बेसिनों में बाँटा गया है, जिनमें गंगा बेसिन अकेला ८,६१,४५२ वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है।
भारत में लगभग ४०० नदियाँ प्रमुख बेसिनों के साथ हैं। केंद्रीय जल आयोग इन्हें १२ प्रमुख बेसिन (जलग्रहण क्षेत्र >२०,००० वर्ग किमी), ४६ मध्यम बेसिन (२,०००–२०,००० वर्ग किमी) और अनेक लघु बेसिनों में वर्गीकृत करता है। भारत की नदियाँ मिलकर प्रतिवर्ष लगभग १,८६९ अरब घन मीटर जल प्रवाहित करती हैं — यद्यपि उपयोगी जल केवल ~१,१२३ अरब घन मीटर है।
अपवाह बेसिन बनाम जलविभाजक
अपवाह बेसिन (जलग्रहण क्षेत्र): किसी नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित कुल क्षेत्रफल। जलविभाजक: वह कटक/पहाड़ी रेखा जो आसन्न अपवाह बेसिनों को पृथक करती है। पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय भारत का प्रमुख जलविभाजक है, जो पश्चिम-प्रवाही (अरब सागर) नदियों को पूर्व-प्रवाही (बंगाल की खाड़ी) नदियों से अलग करता है।
दो व्यापक श्रेणियाँ
- हिमालयी नदियाँ: बारहमासी (वर्षभर प्रवाहित), हिमनद और हिम-पोषित, लंबी, भारी तलछट भार, पूर्ववर्ती अपवाह, बाढ़-प्रवण
- प्रायद्वीपीय नदियाँ: अधिकांशतः मौसमी (वर्षा-पोषित), छोटी, कम तलछट, कठोर चट्टानी मार्गों से प्रवाहित, अनुवर्ती या अनुगामी अपवाह प्रतिमान
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M कृष्णा नदी की कोई आठ सहायक नदियों के नाम लिखिए।
आदर्श उत्तर
कृष्णा नदी (1,400 किमी; महाबलेश्वर, महाराष्ट्र) की प्रमुख सहायक नदियाँ: (1) भीमा (861 किमी, दाईं); (2) तुंगभद्रा (दाईं — हम्पी); (3) घटप्रभा (दाईं); (4) मालप्रभा (दाईं); (5) मूसी (दाईं — हैदराबाद); (6) कोयना (बाईं — कोयना बाँध); (7) यर्ला (बाईं); (8) मुनेरु (बाईं)। तुंगभद्रा इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी है।
~50 शब्द • 5 अंक
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