औद्योगिक विकास: निवेश संवर्धन, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम, पेट्रोलियम संसाधन
मुख्य तथ्य
- RIICO राजस्थान में 424 औद्योगिक क्षेत्रों का प्रबंधन करता है जिनमें 44,560+ उत्पादन इकाइयाँ हैं।
- राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन (दिसंबर 2024) में ₹35 लाख करोड़ के MoU — राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा निवेश आयोजन।
- RIPS 2024 में निवेश अनुदान, SGST प्रतिपूर्ति और रोजगार प्रोत्साहन सहित राजकोषीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
- राजस्थान भारत के स्थलीय कच्चे तेल का 14.95% उत्पादन करता है, मुख्यतः बाड़मेर-सांचोर बेसिन (मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या क्षेत्र) से।
- पचपदरा रिफाइनरी (9 MMTPA) 84% पूरी; ₹71,509 करोड़ के कार्य आदेशों में से ₹52,332.50 करोड़ खर्च; 24,000+ कर्मचारी कार्यरत।
मुख्य बिंदु
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RIICO राजस्थान में 424 औद्योगिक क्षेत्रों का प्रबंधन करता है जिनमें 44,560+ उत्पादन इकाइयाँ हैं।
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राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन (दिसंबर 2024) में ₹35 लाख करोड़ के MoU — राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा निवेश आयोजन।
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RIPS 2024 में निवेश अनुदान, SGST प्रतिपूर्ति और रोजगार प्रोत्साहन सहित राजकोषीय प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
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राजस्थान भारत के स्थलीय कच्चे तेल का 14.95% उत्पादन करता है, मुख्यतः बाड़मेर-सांचोर बेसिन (मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या क्षेत्र) से।
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पचपदरा रिफाइनरी (9 MMTPA) 84% पूरी; ₹71,509 करोड़ के कार्य आदेशों में से ₹52,332.50 करोड़ खर्च; 24,000+ कर्मचारी कार्यरत।
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राजस्थान सीमेंट उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पर; विशाल चूना पत्थर भंडार चित्तौड़गढ़, नागौर और निंबाहेड़ा में।
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भीलवाड़ा भारत की "सूटिंग राजधानी" — 10 लाख+ तकुए और 1 लाख+ पावरलूम; पाली राजस्थान का सबसे बड़ा वस्त्र प्रसंस्करण केंद्र।
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नीमराना जापानी निवेश क्षेत्र में 50+ जापानी कंपनियाँ कार्यरत हैं, जिनमें होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया, डाइकिन एयर कंडीशनिंग और टोयोडा गोसेई शामिल हैं।
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महिंद्रा वर्ल्ड सिटी, जयपुर — राजस्थान का पहला SEZ — 3,000+ एकड़ में IT, ऑटो कंपोनेंट और परिधान क्षेत्र।
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2023-24 में राजस्थान का कुल निर्यात ₹83,704.24 करोड़; हस्तशिल्प, रत्न-आभूषण और वस्त्र प्रमुख निर्यात श्रेणियाँ।
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पंजीकृत विनिर्माण में सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) 2023-24 में ₹32,838 करोड़।
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दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) राजस्थान के 6 जिलों से होकर गुजरता है।
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बाड़मेर कच्चा तेल उत्पादन: 15 क्षेत्रों से 66,000-67,000 बैरल/दिन; प्राकृतिक गैस 3.50-3.70 MMSCM/दिन।
आरएएस मुख्य परीक्षा में औद्योगिक विकास, एमएसएमई और पेट्रोलियम संसाधन कैसे पढ़ने हैं?
आरएएस मुख्य परीक्षा में औद्योगिक विकास, एमएसएमई और पेट्रोलियम संसाधन राजस्थान की अर्थव्यवस्था के उस हिस्से को समझाते हैं जहाँ नीति, औद्योगिक भूमि, निवेश, छोटे उद्यम, निर्यात और तेल-गैस उत्पादन सीधे राज्य के रोजगार और राजस्व से जुड़ते हैं। आरपीएससी की ०९/०१/२०२६ को प्रकाशित आधिकारिक पाठ्यक्रम सूची में आरएएस २०२६ मुख्य परीक्षा के लिए योजना और हिंदी-अंग्रेज़ी पाठ्यक्रम अलग-अलग प्रविष्टियों में प्रकाशित हैं, इसलिए इस विषय को केवल सामान्य उद्योग-नोट की तरह नहीं बल्कि प्रश्नपत्र प्रथम की राज्य-केंद्रित अर्थशास्त्र इकाई की तरह पढ़ना चाहिए।
आरपीएससी २०२६ मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में औद्योगिक विकास को प्रश्नपत्र प्रथम, इकाई २, अर्थशास्त्र के अंतर्गत रखा गया है। विषय-क्षेत्र राजस्थान-विशिष्ट है और तीन परस्पर जुड़े स्तंभों पर केंद्रित है: निवेश प्रोत्साहन (संस्थागत अवसंरचना, विशेष आर्थिक क्षेत्र, औद्योगिक गलियारे और नीति ढाँचे सहित), एमएसएमई (परिभाषा, पंजीकरण, रोजगार, ऋण और नीति समर्थन), और पेट्रोलियम संसाधन (अन्वेषण, उत्पादन और पचपदरा रिफाइनरी)।
यह एक टियर ३ / मानक विषय है, जो हाल के आरएएस मुख्य परीक्षा चक्रों में दो बार आया है। परीक्षा में सामान्यतः संस्थाओं (रीको, राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना), विशिष्ट परियोजनाओं (राइजिंग राजस्थान, पचपदरा रिफाइनरी), और औद्योगिक समूहों (भीलवाड़ा वस्त्र, नीमराना जापानी क्षेत्र) पर तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। २०२६ के संशोधित पाठ्यक्रम में राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना २०२४, राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन २०२४, और एमएसएमई का स्पष्ट उल्लेख है; इसलिए २०२६ में निवेश नीति और एमएसएमई आँकड़ों को मिलाकर १०-अंकीय प्रश्न की अच्छी संभावना है।
इस अध्याय में छह मुख्य क्षेत्र शामिल हैं:
- रीको और औद्योगिक क्षेत्र अवसंरचना
- निवेश प्रोत्साहन नीति: राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना २०२४ और राइजिंग राजस्थान शिखर सम्मेलन २०२४
- विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक गलियारे: महिंद्रा वर्ल्ड सिटी, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, नीमराना
- प्रमुख औद्योगिक समूह: सीमेंट, वस्त्र, हस्तशिल्प, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग
- एमएसएमई: वर्तमान परिभाषा, पंजीकृत इकाइयाँ, रोजगार, ऋण और राज्य नीति
- पेट्रोलियम: बाड़मेर-सांचोर बेसिन, मंगला/भाग्यम/ऐश्वर्या क्षेत्र, प्राकृतिक गैस और पचपदरा रिफाइनरी
इस अध्याय के बाहर का विषय: खनिज एवं खनन (विषय ८८), अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स (विषय ३६), सकल राज्य घरेलू उत्पाद और व्यापक आर्थिक संकेतक (विषय ३१)। फिर भी उत्तर लिखते समय इनसे संबंध बनाना उपयोगी है, क्योंकि उद्योग, खनिज, ऊर्जा, सड़क-रेल संपर्क और निर्यात अलग-अलग नहीं चलते।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M भारत के स्थलीय कच्चे तेल उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी क्या है और राज्य के प्रमुख तेल उत्पादन क्षेत्र कौन-से हैं?
आदर्श उत्तर
राजस्थान भारत के स्थलीय कच्चे तेल का 14.95% उत्पादन करता है (4.39 MMTPA, राष्ट्रीय 29.36 MMTPA में से)। प्रमुख क्षेत्र: मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या — बाड़मेर-सांचोर बेसिन (Block RJ-ON-90/1), Vedanta Ltd. द्वारा संचालित। 15 क्षेत्रों से 66,000-67,000 बैरल/दिन।
~50 शब्द • 5 अंक
जो पहला बंद टॉपिक आप खोलेंगे, वह आपका रहेगा; बाकी के लिए स्टडी पैक या पूरा कोर्स चाहिए।
