मुख्य तथ्य

  • पृथ्वीराज तृतीय (चाहमान) — तराइन प्रथम युद्ध (1191 ई.) में मुहम्मद गोरी को पराजित किया
  • मेवाड़ के राणा कुम्भा (1433–1468 ई.) — 32 दुर्गों का निर्माण किया, जिनमें कुम्भलगढ़ प्रमुख है — 4 वैदिक टीकाएँ और संगीत-राज ग्रंथ लिखा
  • राणा साँगा (1508–1528 ई.) — 1,00,000 सैनिकों का राजपूत संघ बनाया — खानवा युद्ध (1527 ई.) में बाबर की तिमुरिद तोपखाने से पराजित हुए
  • महाराणा प्रताप (1572–1597 ई.) — हल्दीघाटी युद्ध (18 जून 1576 ई.) में मान सिंह I के नेतृत्व में अकबर की सेना का सामना किया
  • मारवाड़ के राव मालदेव (1532–1562 ई.) — जोधपुर का क्षेत्रफल 80,000 वर्ग किमी तक विस्तारित किया — उस युग का सबसे बड़ा राजपूत राज्य

मुख्य बिंदु

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    पृथ्वीराज तृतीय (चाहमान)

    • तराइन प्रथम युद्ध (1191 ई.) में मुहम्मद गोरी को पराजित किया
    • तराइन द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में पराजित होकर वीरगति प्राप्त की
    • उनकी पराजय से उत्तर भारत में राजपूत प्रभुत्व समाप्त हुआ
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    मेवाड़ के राणा कुम्भा (1433–1468 ई.)

    • 32 दुर्गों का निर्माण किया, जिनमें कुम्भलगढ़ प्रमुख है
    • 4 वैदिक टीकाएँ और संगीत-राज ग्रंथ लिखा
    • चित्तौड़गढ़ में विजय स्तम्भ (1448 ई.) का निर्माण करवाया
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    राणा साँगा (1508–1528 ई.)

    • 1,00,000 सैनिकों का राजपूत संघ बनाया
    • खानवा युद्ध (1527 ई.) में बाबर की तिमुरिद तोपखाने से पराजित हुए
    • उनकी पराजय से भारत में मुगल सत्ता दृढ़ हो गई
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    महाराणा प्रताप (1572–1597 ई.)

    • हल्दीघाटी युद्ध (18 जून 1576 ई.) में मान सिंह I के नेतृत्व में अकबर की सेना का सामना किया
    • 25 वर्षों तक अरावली के जंगलों से छापामार युद्ध जारी रखा
    • मेवाड़ की स्वतंत्रता कभी नहीं छोड़ी
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    मारवाड़ के राव मालदेव (1532–1562 ई.)

    • जोधपुर का क्षेत्रफल 80,000 वर्ग किमी तक विस्तारित किया — उस युग का सबसे बड़ा राजपूत राज्य
    • हुमायूँ को शरण देने का प्रस्ताव दिया, फिर खैरवा (1542 ई.) में वापस लिया
    • सामेल युद्ध (1544 ई.) में शेरशाह का प्रतिरोध किया; उनकी कूटनीति ने उत्तर भारत की राजनीति को आकार दिया
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    सवाई जय सिंह द्वितीय (1699–1743 ई.)

    • 1727 ई. में विद्याधर की 9-खंड योजना पर जयपुर नगर की स्थापना की
    • दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में 5 जंतर-मंतर वेधशालाएँ बनवाईं
    • खगोलीय ग्रंथ ज़ीज-ए-मुहम्मद शाही (1738 ई.) लिखा
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    आमेर के मान सिंह प्रथम (1589–1614 ई.)

    • अकबर के सेनापति थे, मनसब 7,000 जात — किसी भी राजपूत सरदार के लिए सर्वोच्च
    • आमेर में मान सिंह महल (1592 ई.) और वृंदावन में गोविंददेव मंदिर बनवाया
    • मुगल गठबंधन ने राजपूत-मुगल राजनीतिक समायोजन का आदर्श स्थापित किया
    • नोट: ग्वालियर का मान मंदिर महल तोमर वंश के मान सिंह तोमर (लगभग 1486–1516 ई.) द्वारा निर्मित था — ये भिन्न शासक हैं
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    रणथंभौर दुर्ग

    • लगभग 944 ई. से चाहमानों के अधीन; अरावली-विंध्य व्यापार मार्ग को नियंत्रित करता था
    • 19 जलाशय दीर्घ घेराबंदी में सहायक थे
    • 1301 ई. में हम्मीरदेव के नेतृत्व में अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध जौहर राजपूत शौर्य का प्रतीक बना
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    मेहरानगढ़ दुर्ग (1459 ई.)

    • राव जोधा द्वारा जोधपुर में 122 मीटर ऊँची चट्टान पर स्थापित
    • 7 द्वार हैं: जयपोल (1806 ई. — जयपुर-बीकानेर पर विजय) और फतेहपोल (1707 ई. — मुगलों पर विजय) प्रमुख हैं
    • आंतरिक महलों में मोती महल, फूल महल और शीश महल शामिल हैं
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    राजस्थान की लघुचित्र शैलियाँ

    • पाँच प्रमुख शैलियाँ: मेवाड़ (प्राचीनतम, लगभग 1260 ई.), मारवाड़, आमेर-जयपुर, बूँदी-कोटा और बीकानेर
    • प्रत्येक शैली का अपना विशिष्ट रंग-संयोजन, विषय और पहचान है
    • किशनगढ़ शैली (लगभग 1720–1850 ई.) ने प्रतिष्ठित बानी ठनी चित्र दिया
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    बप्पा रावल (लगभग 728 ई.) — गुहिल वंश

    • सिंध विजय (712 ई.) के बाद राजस्थान में घुसे अरब आक्रमणकारियों को पराजित किया
    • मेवाड़ की स्थायी संप्रभुता स्थापित की; चित्तौड़गढ़ दुर्ग प्राप्त किया
    • कैलाशपुरी (उदयपुर) में एकलिंगजी मंदिर की स्थापना/जीर्णोद्धार लगभग 734 ई. में करवाया
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    दीन-ए-इलाही (1582 ई.)

    • अकबर का समन्वित पंथ — इस्लाम, हिंदू, पारसी और ईसाई तत्त्वों का संयोजन
    • केवल ~18 अनुयायी बने; 1605 ई. में अकबर की मृत्यु के साथ यह समाप्त हो गया
    • मान सिंह I जैसे राजपूत सहयोगी गठबंधन के बावजूद इसमें शामिल नहीं हुए
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    बूँदी-कोटा के हाड़ा राजपूत

    • 1241 ई. तक हरा देव के नेतृत्व में चम्बल घाटी पर नियंत्रण स्थापित किया
    • बूँदी चित्रकला शैली (लगभग 1600–1750 ई.) अपने नीलम-हरे रंग और हरे-भरे परिदृश्यों के लिए प्रसिद्ध है
    • बूँदी में 50 से अधिक बावड़ियाँ; रानीजी की बावड़ी (1699 ई.) सर्वश्रेष्ठ है
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    जैसलमेर के भाटी

    • 1156 ई. में राव जैसल ने 250 फुट ऊँची त्रिकूट पहाड़ी पर जैसलमेर दुर्ग बनाया
    • दुर्ग के जैन मंदिर (12वीं–15वीं शताब्दी) व्यापारी-संरक्षण स्थापत्य का शिखर हैं
    • पटवों की हवेली (1805 ई. से) मरुस्थलीय व्यापारी स्थापत्य की उत्कृष्ट कृति है

परिचय और पाठ्यक्रम की सीमा

यह अध्याय राजस्थान के प्रमुख शासकों की राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को प्रारम्भिक मध्यकाल से अठारहवीं शताब्दी तक, परीक्षा की जरूरत के हिसाब से, एक साथ पढ़ाता है।

आरपीएससी के आधिकारिक प्रारंभिक पाठ्यक्रम में इस उपविषय के अंतर्गत गुहिल, प्रतिहार, चौहान, परमार, राठौड़, सिसोदिया और कछवाहा — ७ नामित राजवंश आते हैं; इस नोट में परीक्षा-पैटर्न के हिसाब से हाड़ा और भाटी को भी पढ़ाया गया है।

कालक्रम परिधि

यह विषय राजस्थान के प्रमुख शासक राजवंशों के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास को लगभग ६वीं शताब्दी ई. से १८वीं शताब्दी तक समेटता है। व्यावहारिक रूप से यह सवाई जय सिंह द्वितीय (मृत्यु १७४३ ई.) तक विस्तृत है — वे अंतिम शासक थे जिन्होंने औपनिवेशिक दबाव से पूर्व सैन्य-राजनीतिक महत्त्व के साथ महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक संरक्षण को जोड़ा।

प्रमुख वंश

यह विषय स्पष्ट रूप से राजस्थान-केंद्रित है। परीक्षा की दृष्टि से इस नोट में जिन वंशों को मुख्य रूप से पढ़ना है, वे हैं:

  • अजमेर-रणथंभौर के चाहमान (चौहान)
  • मेवाड़ के गुहिल/सिसोदिया
  • मारवाड़ के राठौड़
  • आमेर-जयपुर के कछवाहा
  • बूँदी-कोटा के हाड़ा
  • जैसलमेर के भाटी

पाठ्यक्रम में "राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ" पद सोद्देश्य है — आरपीएससी प्रत्येक उत्तर में दोनों आयामों की अपेक्षा रखता है।

पिछले वर्षों के प्रश्न पैटर्न

पिछले वर्षों के प्रश्न अभिलेख (६ परीक्षाओं में ९ प्रश्न, २०१३–२०२४) एक निरंतर पैटर्न की पुष्टि करता है: आरपीएससी राजवंश के सामान्य विवरण के बजाय विशिष्ट शासकों की परीक्षा लेता है, और प्राय: किसी राजनीतिक घटना को किसी सांस्कृतिक कृति (दुर्ग, चित्रकला, ग्रंथ) से जोड़ता है। २०१३ के प्रश्नपत्र में रणथंभौर के रणनीतिक महत्त्व के बारे में पूछा गया था; २०१६ में राणा कुम्भा के कला और संस्कृति योगदान के बारे में; २०२४ में मेहरानगढ़ की स्थापत्य विशेषताओं के बारे में। तथ्यात्मक सटीकता के साथ दोहरे राजनीतिक-सांस्कृतिक ढाँचे की आवश्यकता तैयारी की प्राथमिकता निर्धारित करती है।

विषय सीमाएँ

यह विषय वहाँ से आरम्भ होता है जहाँ विषय #१ (प्रागैतिहासिक/प्राचीन स्थल) समाप्त होता है — लगभग गुप्त काल से। इन शासकों की राजस्व व्यवस्था विषय #३ में सम्मिलित है — यहाँ उसका पुनरावर्तन न करें। राजस्थान के प्रत्यक्ष अनुभव से परे मुगल-कालीन सामग्री (दीन-ए-इलाही, मुगल कला) के लिए प्रश्नपत्र प्रथम, इकाई १ के सामान्य भारतीय इतिहास खंड देखें।


संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M मेवाड़ के राणा कुम्भा की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

राणा कुम्भा (1433–1468 ई.) मेवाड़ के सर्वश्रेष्ठ शासक थे। राजनीतिक रूप से उन्होंने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को सारंगपुर (1437 ई.) में पराजित किया, 84 दुर्गों पर नियंत्रण रखा और कुम्भलगढ़ की 36 किमी लंबी परकोटा दीवार बनवाई। सांस्कृतिक रूप से उन्होंने संगीत-राज ग्रंथ रचा और चित्तौड़गढ़ में विजय स्तम्भ (1448 ई.) का निर्माण करवाया।

~50 शब्द • 5 अंक