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RAS प्रश्न

19 अप्रैल 2026 को विरुधुनगर की पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ। इसके बाद भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा इस्तेमाल की गई शक्तियों के संदर्भ में कथनों पर विचार कीजिए: 1. आयोग ने मौतों और घायलों की मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया। 2. आयोग ने तमिलनाडु सरकार को नोटिस भेजकर सुरक्षा नियमों के पालन, फैक्ट्री लाइसेंसिंग और पीड़ितों के पुनर्वास पर विस्तृत रिपोर्ट माँगी। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

सही उत्तर: (A) केवल 1।

19 अप्रैल 2026 को विरुधुनगर जिले की एक निजी पटाखा निर्माण इकाई में हुए विस्फोट के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उस मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें कम-से-कम 18 श्रमिकों की मौत और 6 अन्य के घायल होने की जानकारी थी। लेकिन आयोग ने कथन 2 में बताई गई सुरक्षा नियमों के पालन, फैक्ट्री लाइसेंस और पुनर्वास संबंधी रिपोर्ट नहीं माँगी थी।

  1. (A)

    केवल 1

  2. (B)

    केवल 2

  3. (C)

    न तो 1 और न ही 2

  4. (D)

    1 और 2 दोनों

व्याख्या

कथन 1 सही है। 19 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के कट्टनारपट्टी क्षेत्र की एक निजी पटाखा निर्माण इकाई में विस्फोट हुआ था। 24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उस मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें कम-से-कम 18 श्रमिकों की मौत और 6 अन्य के घायल होने की जानकारी थी। आयोग ने माना कि रिपोर्ट सही होने पर यह घटना पीड़ितों के मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल उठाती है। कथन 2 गलत है। आयोग ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव और विरुधुनगर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस भेजकर 2 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी। इसमें घायलों की स्वास्थ्य-स्थिति, मामले की जाँच और मृतकों के परिजनों तथा घायलों को दिए गए मुआवजे, यदि कोई हो, की जानकारी माँगी गई थी। सुरक्षा नियमों के पालन, फैक्ट्री लाइसेंस या पुनर्वास की जानकारी नहीं माँगी गई थी।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (B) यह विकल्प केवल कथन 2 को सही मानता है, लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुरक्षा नियमों के पालन, फैक्ट्री लाइसेंस या पुनर्वास की जानकारी नहीं माँगी थी।
  • (C) यह विकल्प कथन 1 को गलत मानता है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने श्रमिकों की मौत और घायलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था।
  • (D) यह विकल्प दोनों कथनों को सही मानता है, लेकिन कथन 2 में सुरक्षा नियमों के पालन, फैक्ट्री लाइसेंस और पुनर्वास को नोटिस में शामिल बताया गया है, जबकि इनमें से किसी विषय पर जानकारी नहीं माँगी गई थी।

अवधारणा

यह प्रश्न राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी वैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ जाँचता है, खासकर यह कि मानवाधिकार उल्लंघन की सूचना मिलने पर आयोग स्वतः संज्ञान लेने और नोटिस जारी करने की शक्तियों का कैसे इस्तेमाल करता है। RAS में ऐसे प्रश्न महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि शासन से जुड़े प्रश्नों का उत्तर अक्सर इस बात पर निर्भर करता है कि किस शक्ति का इस्तेमाल हुआ और नोटिस में ठीक-ठीक कौन-सी जानकारी माँगी गई।

स्रोत

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