RAS प्रश्न
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के CAG ऑडिट में कितने प्रतिशत लाभार्थियों के रिक्त, शून्य या अनुपलब्ध बैंक-खाता विवरण पाए गए?
सही उत्तर: (C) 94-95%।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के ऑडिट में पाया कि PMKVY 2.0 और 3.0 के 94.53% प्रतिभागियों के बैंक खातों की जानकारी में 0, कोई मान नहीं, लागू नहीं या खाली दर्ज था।
व्याख्या
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के प्रदर्शन ऑडिट के अनुसार, स्किल इंडिया पोर्टल पर उम्मीदवारों के संपर्क और बैंक खातों की जानकारी दर्ज होना ज़रूरी था। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के दिशानिर्देशों में भी वैध बैंक खाते की शर्त थी, ताकि प्रमाणित उम्मीदवार को ₹500 का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से किया जा सके। फिर भी PMKVY 2.0 और 3.0 के आंकड़ों में कुल 95,90,801 प्रतिभागियों में से 90,66,264 के बैंक खातों की जानकारी में 0, कोई मान नहीं, लागू नहीं या खाली दर्ज था। यह 94.53% है, इसलिए 94-95% वाला विकल्प सही है। बाकी रिकॉर्डों में भी कई खाता संख्याएँ दोहराई गई थीं या गलत लग रही थीं। इसलिए यह केवल डेटा दर्ज करने की छोटी गलती नहीं थी; ₹10,194 करोड़ की इस सरकारी योजना में इससे यह भरोसा कमज़ोर हुआ कि सही लाभार्थी की पहचान हुई, भुगतान सही खाते में पहुँचा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ठीक से हुआ।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) 45-50% ऑडिट के निष्कर्ष को लगभग आधा कर देता है; CAG ने PMKVY 2.0 और 3.0 के 94.53% प्रतिभागियों के बैंक खातों की जानकारी में 0, कोई मान नहीं, लागू नहीं या खाली पाया था।
- (B) 70-75% भी CAG के दर्ज अनुपात से कम है। रिपोर्ट में 95,90,801 प्रतिभागियों में से 90,66,264, यानी 94.53%, के बैंक खातों की जानकारी में 0, कोई मान नहीं, लागू नहीं या खाली दर्ज था।
- (D) 30-35% से लगता कि आंकड़ों की समस्या सीमित थी, जबकि ऑडिट में लगभग पूरे डेटा-समूह—94.53%—के बैंक खातों की जानकारी में 0, कोई मान नहीं, लागू नहीं या खाली मिला।
अवधारणा
यह सवाल इस बात की समझ परखता है कि सरकारी ऑडिट और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की जाँच से जवाबदेही कैसे तय होती है। लाभार्थियों के अधूरे या अविश्वसनीय आंकड़े कल्याणकारी और कौशल-विकास योजनाओं में जवाबदेही कमज़ोर कर सकते हैं। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं, क्योंकि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टें सार्वजनिक वित्त, योजनाओं के क्रियान्वयन की कमियों और संस्थागत निगरानी पर प्रश्नों के लिए ठोस आधार देती हैं।
