RAS प्रश्न
10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता के मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार किसके पास है?
सही उत्तर: (B) संबंधित सदन का सभापति या अध्यक्ष।
10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल के आधार पर अयोग्यता के प्रश्नों पर निर्णय संबंधित सदन के सभापति या अध्यक्ष करते हैं।
व्याख्या
10वीं अनुसूची का पैराग्राफ 6 दल-बदल से जुड़ी अयोग्यता के प्रश्नों पर निर्णय का अधिकार संबंधित सदन के सभापति या अध्यक्ष को देता है। इसलिए लोकसभा या विधानसभा जैसे सदन में यह निर्णय उसी सदन के अध्यक्ष के पास, और राज्यसभा या विधान परिषद जैसे सदन में सभापति के पास जाता है। सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका अलग रहती है: किहोतो होलोहन बनाम जचिल्हू (1992) में माना गया कि अध्यक्ष या सभापति का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन हो सकता है। यानी प्रारंभिक और वैधानिक निर्णय अध्यक्ष/सभापति का है, लेकिन वह न्यायालय की समीक्षा से पूरी तरह बाहर नहीं है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) भारत का सर्वोच्च न्यायालय अध्यक्ष या सभापति के निर्णय की न्यायिक समीक्षा कर सकता है, लेकिन 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 6 के तहत अयोग्यता का मूल निर्णय उसके पास नहीं है।
- (C) भारत का निर्वाचन आयोग 10वीं अनुसूची के दल-बदल वाले निर्णय का प्राधिकारी नहीं है; यहां निर्णय सदन के सभापति या अध्यक्ष को दिया गया है।
- (D) भारत के राष्ट्रपति की भूमिका 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 6 में दल-बदल अयोग्यता के निर्णय से अलग है, इसलिए राष्ट्रपति अंतिम निर्णयकर्ता नहीं हैं।
अवधारणा
भारतीय संविधान में दल-बदल विरोधी कानून और विधायिका के पीठासीन अधिकारी की भूमिका साथ-साथ समझनी पड़ती है। RAS में यह संवैधानिक क्षेत्र बार-बार आता है क्योंकि इसमें संवैधानिक पाठ और न्यायिक समीक्षा, दोनों को साथ पढ़ना पड़ता है।
