RAS प्रश्न
किसी सार्वजनिक प्राधिकरण को उसका अनिवार्य कर्तव्य निभाने का निर्देश देने के लिए न्यायालय कौन-सी रिट जारी करता है?
सही उत्तर: (A) परमादेश।
सार्वजनिक प्राधिकरण या अधिकारी को उसका अनिवार्य सार्वजनिक कर्तव्य निभाने के लिए न्यायालय परमादेश जारी करता है।
व्याख्या
परमादेश में न्यायालय किसी सार्वजनिक अधिकारी या प्राधिकरण को वह कर्तव्य करने का निर्देश देता है जिसे उसने नहीं किया है। सार्वजनिक प्राधिकरण और अनिवार्य कर्तव्य, दोनों संकेत परमादेश की ओर ले जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी परमादेश को जन-विधि का उपाय बताया गया है, जिसका उपयोग सार्वजनिक या वैधानिक प्राधिकरणों को उनके कर्तव्य निभाने के लिए बाध्य करने में होता है। सुप्रीम कोर्ट निर्णय के अनुसार इसका दायरा सार्वजनिक कर्तव्य के प्रवर्तन से तय होता है, केवल प्राधिकरण की पहचान से नहीं। इसलिए यदि किसी सार्वजनिक निकाय ने अपने कर्तव्य से इनकार किया है या उसे पूरा नहीं किया है, तो उपयुक्त रिट परमादेश है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) उत्प्रेषण का संबंध अनिवार्य सार्वजनिक कर्तव्य को पूरा कराने से नहीं है; परमादेश ही अधिकारी या प्राधिकरण को कर्तव्य निभाने का निर्देश देता है।
- (C) बंदी प्रत्यक्षीकरण यहां लागू नहीं होता, क्योंकि इसमें किसी व्यक्ति की हिरासत नहीं, बल्कि सार्वजनिक प्राधिकरण के अधूरे कर्तव्य की बात है।
- (D) अधिकार पृच्छा में मुद्दा किसी पद पर अधिकार का होता है, जबकि परमादेश सार्वजनिक अधिकारी या प्राधिकरण से उसका अनिवार्य कर्तव्य करवाने के लिए जारी होता है।
अवधारणा
रिट अधिकारिता और सार्वजनिक विधि उपायों की बुनियादी समझ संविधान के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है क्योंकि प्रशासनिक जवाबदेही, न्यायिक नियंत्रण और मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से सीधे जुड़ा है।
