RAS प्रश्न
दिल्ली के किस सुल्तान ने कांसे और तांबे के सिक्कों की प्रतीकात्मक मुद्रा प्रचलित की?
सही उत्तर: (D) मुहम्मद बिन तुगलक।
दिल्ली सल्तनत में कांस्य और तांबे के सिक्कों की सांकेतिक मुद्रा मुहम्मद बिन तुगलक ने 1329-30 में चलाई थी।
व्याख्या
मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351) ने 1329-30 में चाँदी के टंके के बराबर मूल्य पर कांस्य और तांबे के सिक्कों को सांकेतिक मुद्रा के रूप में चलाया। उसके शासन को दिल्ली सल्तनत की सिक्का-प्रणाली में बड़े प्रयोगों का दौर माना जाता है और सांकेतिक मुद्रा की शुरुआत भी उसी से जोड़ी जाती है। यही कारण है कि विकल्प D सही है। इस प्रयोग का उद्देश्य कम मूल्य की धातु के सिक्के को उच्च मूल्य की मुद्रा की तरह चलाना था, लेकिन व्यवस्था टिक नहीं सकी। लोगों ने घरों में नकली सिक्के बनाने शुरू कर दिए, आर्थिक अराजकता फैली और अंततः सुल्तान को यह योजना वापस लेनी पड़ी।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) सिकन्दर लोदी इस प्रश्न का उत्तर नहीं है, क्योंकि वह राजधानी आगरा ले जाने से जुड़ा है, सांकेतिक मुद्रा चलाने से नहीं।
- (B) फिरोज शाह तुगलक नहरों से जुड़ा है, जबकि कांस्य और तांबे की सांकेतिक मुद्रा मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोग से संबंधित है।
- (C) अलाउद्दीन खिलजी बाजार सुधारों के लिए जाना जाता है; यहाँ पूछा गया प्रयोग चाँदी के टंके के बराबर मूल्य वाली कांस्य/तांबे की सांकेतिक मुद्रा का है।
अवधारणा
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत की आर्थिक नीतियों और सिक्का-प्रणाली की समझ जाँचता है। RAS में मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोग बार-बार पूछे जाते हैं, क्योंकि वे नीति, प्रशासन और आर्थिक परिणामों को साथ जोड़ते हैं।
