RAS प्रश्न
निम्नलिखित में से कौन सा विद्वान राणा कुम्भा के दरबार में नहीं था?
सही उत्तर: (D) मुनि जिन विजय सूरी।
मुनि जिन विजय सूरी राणा कुम्भा के दरबार में नहीं थे; वे 1888 में जन्मे 20वीं सदी के जैन विद्वान थे।
व्याख्या
राणा कुम्भा का दरबार विद्वानों, कवियों और कलाकारों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध था, और कुम्भा स्वयं संगीत तथा साहित्य के गंभीर अध्येता माने जाते हैं। दरबार से जुड़े नामों और बाद के काल के नामों को अलग करना यहां मुख्य जांच है। मुनि जिन विजय सूरी का जीवन-काल 1888 से 1976 था, इसलिए वे 15वीं सदी के राणा कुम्भा के दरबार में हो ही नहीं सकते थे। दूसरी ओर नाथा, मुनि सुंदर सूरी और टिल्ला भट्ट कुम्भा के दरबार से जुड़े विद्वान थे। इसलिए अपवाद केवल मुनि जिन विजय सूरी हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) नाथा कुम्भा के दरबार में उपस्थित विद्वान थे, इसलिए वह अपवाद नहीं हैं।
- (B) मुनि सुंदर सूरी कुम्भा के दरबार से जुड़े जैन विद्वान थे, इसलिए उन्हें बाहर का नाम नहीं माना जा सकता।
- (C) टिल्ला भट्ट कुम्भा के दरबार के उल्लेखनीय विद्वान थे, इसलिए यह विकल्प सही अपवाद नहीं बनता।
अवधारणा
मेवाड़ के सांस्कृतिक इतिहास में राणा कुम्भा का विद्वत् संरक्षण महत्वपूर्ण है। RAS में ऐसे नाम इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि राजस्थान इतिहास में शासक, दरबार और साहित्य-संगीत संरक्षण को साथ पढ़ना पड़ता है।
