RAS प्रश्न
औवा के किस राजपूत शासक ने एरिनपुरा के विद्रोही सैनिकों को शरण दी?
सही उत्तर: (A) ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत।
औवा के ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत ने एरिनपुरा के विद्रोही सैनिकों को शरण दी और अंग्रेज़ों के विरुद्ध उनका नेतृत्व स्वीकार किया।
व्याख्या
1857 के विद्रोह में औवा की भूमिका स्थानीय नेतृत्व के कारण महत्वपूर्ण रही। पाली जिले के औवा के ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत ने एरिनपुरा से आए विद्रोही सैनिकों का स्वागत किया और उनका नेतृत्व संभाला। इसलिए यहां केवल शरण देने की बात नहीं है; कुशाल सिंह ने विद्रोही सैनिकों को अंग्रेज़ों के विरुद्ध संगठित नेतृत्व भी दिया। इसी क्रम में उन्होंने अपने विरुद्ध भेजी गई पहली ब्रिटिश सेना को पराजित किया और कैप्टन मेसन मारा गया। औवा और एरिनपुरा की इस घटना में निर्णायक नाम ठाकुर कुशाल सिंह चम्पावत है, कोई अन्य राजपूत शासक नहीं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) ठाकुर ज़ोरावर सिंह गलत हैं, क्योंकि एरिनपुरा के विद्रोही सैनिकों को औवा में शरण देने और उनका नेतृत्व स्वीकार करने वाली घटना कुशाल सिंह चम्पावत से जुड़ी है।
- (C) राव प्रताप सिंह सही नहीं हैं, क्योंकि औवा में विद्रोही सैनिकों का स्वागत करने और उनका नेतृत्व संभालने की भूमिका कुशाल सिंह चम्पावत से जुड़ी है।
- (D) रावत केसरी सिंह उत्तर नहीं हो सकते, क्योंकि औवा में विद्रोही सैनिकों के नेतृत्व और पहली ब्रिटिश सेना की पराजय का संबंध कुशाल सिंह चम्पावत से है।
अवधारणा
राजस्थान में 1857 के विद्रोह के स्थानीय केंद्रों और नेतृत्व में औवा का विशेष स्थान है। RAS में औवा इसलिए महत्वपूर्ण रहता है क्योंकि इससे एरिनपुरा के सैनिकों, स्थानीय ठाकुर नेतृत्व और ब्रिटिश विरोधी कार्रवाई का संबंध सीधे बनता है।
