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RAS प्रश्न

दिए गए ऐतिहासिक संदर्भों में जयपुर राजघराने की सही पहचान किस युग्म से होती है?

सही उत्तर: (A) ढूंढाड़ की कछवाहा परंपरा, आमेर-जयपुर घराने और अन्नपूर्णा मान्यता से जुड़ी।

जयपुर राजघराने की सही पहचान ढूंढाड़ की कछवाहा परंपरा से है, जो आमेर-जयपुर घराने और अन्नपूर्णा मान्यता से जुड़ी है।

  1. (A)

    ढूंढाड़ की कछवाहा परंपरा, आमेर-जयपुर घराने और अन्नपूर्णा मान्यता से जुड़ी

  2. (B)

    बीकानेर राजघराना, जिसकी पहचान इस पृष्ठ पर करणी माता से कराई गई है

  3. (C)

    जोधपुर राजघराना, जहाँ नागणेची की मान्यता बताई गई है

  4. (D)

    जैसलमेर की भाटी परंपरा, जिसे स्वांगिया देवी से जोड़ा गया है

व्याख्या

सही युग्म ढूंढाड़ की कछवाहा परंपरा, आमेर-जयपुर घराने और अन्नपूर्णा मान्यता वाला है। राजस्थान फाउंडेशन, जयपुर के पृष्ठ 23 पर ढूंढाड़ में मीणा शक्ति के बाद कछवाहा प्रभुत्व को आमेर-जयपुर राजघराने से जोड़ा गया है। आमेर जयपुर का पूर्ववर्ती केंद्र, कछवाहा शासकों का गढ़ और ढूंढाड़ की राजधानी रहा है। पृष्ठ 71 पर जयपुर की मान्य कुलदेवी अन्नपूर्णा है। इसलिए विकल्प A में राजवंशीय क्षेत्र, राजघराना और देवी-मान्यता तीनों जयपुर से एक साथ मिलते हैं; बाकी विकल्प अलग-अलग रियासतों की देवियों को जयपुर पर रख देते हैं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) करणी माता का संबंध बीकानेर से है, इसलिए उसे जयपुर राजघराने की पहचान बनाना राजघराने और देवी-मान्यता दोनों को गलत मिला देता है।
  • (C) नागणेची की मान्यता जोधपुर से जुड़ी है, जबकि जयपुर के लिए अन्नपूर्णा मान्य है।
  • (D) स्वांगिया देवी जैसलमेर के भाटियों से जुड़ी है, इसलिए यह जयपुर के आमेर-कछवाहा घराने की पहचान नहीं हो सकती।

अवधारणा

राजस्थान के राजवंशों, क्षेत्रीय राजघरानों और उनकी कुलदेवी-परंपराओं की पहचान आरएएस के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे युग्म बार-बार आते हैं क्योंकि एक ही देवी या राजवंश को गलत रियासत से जोड़कर भ्रम पैदा किया जाता है।

स्रोत

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