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RAS प्रश्न

मूल कर्तव्यों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

सही उत्तर: (A) वे नीति निदेशक तत्वों की तरह वाद-योग्य नहीं हैं।

मूल कर्तव्य नीति निदेशक तत्वों की तरह वाद-योग्य नहीं हैं, यानी उन्हें न्यायालयों से सीधे लागू नहीं कराया जा सकता।

  1. (A)

    वे नीति निदेशक तत्वों की तरह वाद-योग्य नहीं हैं

  2. (B)

    वे 1950 के मूल संविधान का हिस्सा थे

  3. (C)

    वे नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों पर लागू होते हैं

  4. (D)

    उन्हें अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सीधे लागू किया जा सकता है

व्याख्या

मूल कर्तव्य संविधान के भाग 4-क में अनुच्छेद 51A के तहत रखे गए नागरिकों के नैतिक और नागरिक दायित्व हैं। पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार ये कानूनी रूप से सीधे लागू होने वाले आदेश नहीं हैं; मूल अधिकारों के विपरीत, जो न्यायालयों में वाद-योग्य हैं, मूल कर्तव्य वाद-योग्य नहीं रहते। इसलिए विकल्प A सही है। इसका मतलब यह नहीं कि वे बेअसर हैं: सर्वोच्च न्यायालय अस्पष्ट कानूनों की व्याख्या और किसी विधान की संवैधानिकता पर विचार करते समय इनका सहारा ले सकता है। ये केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं और 1950 के मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे; इन्हें 1976 में जोड़ा गया।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) यह विकल्प गलत है क्योंकि मूल कर्तव्य 1950 के मूल संविधान में नहीं थे; इन्हें 1976 में जोड़ा गया।
  • (C) यह विकल्प गलत है क्योंकि अनुच्छेद 51A की भाषा नागरिक के कर्तव्य की बात करती है और ये विदेशियों पर लागू नहीं होते।
  • (D) यह विकल्प गलत है क्योंकि मूल कर्तव्य वाद-योग्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय से सीधे लागू नहीं कराया जा सकता।

अवधारणा

मूल अधिकार, नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य के बीच वाद-योग्यता और लागू-क्षेत्र का फर्क संवैधानिक समझ का जरूरी हिस्सा है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि संविधान के भागों, अनुच्छेदों और न्यायालयी प्रवर्तन की तुलना से सीधे तथ्यात्मक प्रश्न बनते हैं।

स्रोत

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