RAS प्रश्न
कोटा का कौन-सा शासक गद्दी मिलने के बाद दक्खिन के मुगल अभियानों में मराठों से संघर्ष करते हुए अधिक सक्रिय रहा और वहीं उसकी मृत्यु हुई?
सही उत्तर: (C) राव किशोर सिंह।
राव किशोर सिंह कोटा के वही शासक थे जो गद्दी मिलने के बाद दक्खिन में शाही अभियानों से जुड़े रहे और अर्काटगढ़ में मारे गए।
व्याख्या
राव किशोर सिंह की पहचान उनकी गद्दी के बाद की सैन्य भूमिका से बनती है। कोटा के शासकों के क्रम में किशोर सिंह पहले घावों से बचे, फिर गद्दी पर बैठाए गए और औरंगजेब के समय फिर दक्षिण में सेवा करने लगे। बीजापुर की घेराबंदी में वे विशेष रूप से अलग दिखे और अंत में अर्काटगढ़ में मारे गए। गद्दी संभालने के बाद उनकी मुख्य सक्रियता दक्खिन में मराठों से लड़ने वाली शाही सेना के साथ रही और उनका अंत भी वहीं हुआ। इसलिए सही पहचान राव किशोर सिंह है, न कि धर्मत, खजुआ या जाजू से जुड़े दूसरे कोटा शासक।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) राव मुकुन्द सिंह धर्मत के प्रसंग में दारा के पक्ष से जुड़े और वहीं मारे गए पांच भाइयों में गिने जाते हैं; गद्दी के बाद दक्खिन में मराठा-संघर्ष वाली भूमिका उनसे नहीं जुड़ती।
- (B) राव जगत सिंह के साथ शाही सेना का मनसब और दक्खिन सेवा जुड़ी है, लेकिन गद्दी के बाद सक्रिय रहकर वहीं मृत्यु का प्रसंग किशोर सिंह से जुड़ता है।
- (D) राव रामसिंह प्रथम अपने पिता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी बने और जाजू के युद्ध में मारे गए; इसलिए यह दक्खिन में गद्दी-पश्चात मृत्यु वाला प्रसंग नहीं है।
अवधारणा
हाड़ौती-कोटा के शासकों और मुगल-दक्खिन अभियानों में उनकी भूमिका को साथ पढ़ना जरूरी है। RAS में राजस्थान के क्षेत्रीय राजवंश अक्सर बड़े मुगल-राजपूत सैन्य संदर्भ से जुड़े रूप में आते हैं।
