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RAS प्रश्न

किस दिल्ली सुल्तान ने स्वयं को 'जिल्ल-ए-इलाही' (ईश्वर की छाया) कहा?

सही उत्तर: (C) बलबन।

बलबन ने स्वयं को जिल्ल-ए-इलाही, यानी ईश्वर की छाया, कहा।

  1. (A)

    इल्तुतमिश

  2. (B)

    अलाउद्दीन खिलजी

  3. (C)

    बलबन

  4. (D)

    मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या

बलबन (1266-1287) के शासन में दिल्ली सुल्तान की सत्ता को साधारण राजनीतिक पद नहीं, बल्कि दैवी अधिकार से जुड़ी संस्था के रूप में दिखाया गया। उसने स्वयं को जिल्ल-ए-इलाही और नासिर अमीर-उल-मोमिनीन कहा तथा नियाबत-ए-खुदाई का सिद्धांत सामने रखा। NIOS पाठ भी बलबन को सुल्तान की विशेष स्थिति को पृथ्वी पर ईश्वर की छाया के रूप में रेखांकित करने वाला बताता है। इसी सोच से दरबार में वैभव, अनुशासन और शिष्टाचार पर जोर आया। सिजदा और पैबोस जैसे फारसी दरबारी व्यवहार इसी राजसत्ता की दूरी और गरिमा दिखाने के साधन थे। इसलिए सही उत्तर बलबन है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) इल्तुतमिश को जिल्ल-ए-इलाही शीर्षक से नहीं जोड़ा गया है; वह तुर्की विजय के वास्तविक सुदृढ़कर्ता के रूप में आता है।
  • (B) अलाउद्दीन खिलजी के लिए दूसरा सिकंदर वाली पहचान है, जबकि जिल्ल-ए-इलाही वाला दावा बलबन से जुड़ा है।
  • (D) मुहम्मद बिन तुगलक को प्रयोगात्मक सुधारों से जोड़ा गया है, ईश्वर की छाया वाली राजकीय उपाधि से नहीं।

अवधारणा

यह प्रश्न दिल्ली सल्तनत में राजसत्ता के स्वरूप और दरबारी वैधता की अवधारणा को परखता है। RAS में ऐसे तथ्य बार-बार आते हैं क्योंकि वे शासक, उपाधि, प्रशासनिक विचार और दरबारी व्यवहार को एक साथ जोड़ते हैं।

स्रोत

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