Aspirant Academy

RAS प्रश्न

किस संविधान संशोधन ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को एक अलग निकाय के रूप में स्थापित किया?

सही उत्तर: (A) 89वां संशोधन।

89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को अलग संवैधानिक निकाय के रूप में अनुच्छेद 338ए के तहत स्थापित किया।

  1. (A)

    89वां संशोधन

  2. (B)

    73वां संशोधन

  3. (C)

    65वां संशोधन

  4. (D)

    97वां संशोधन

व्याख्या

89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने पहले से संयुक्त रूप में चल रहे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग की व्यवस्था को अलग किया। संशोधन के बाद अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग अनुच्छेद 338 में रहा, जबकि अनुसूचित जनजातियों के लिए अलग राष्ट्रीय आयोग अनुच्छेद 338ए में जोड़ा गया। आधिकारिक संविधान-पाठ में अनुच्छेद 338ए के अंतर्गत साफ लिखा है कि अनुसूचित जनजातियों के लिए एक आयोग होगा, जिसे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग कहा जाएगा। उसी स्रोत के फुटनोट में अनुच्छेद 338ए को संविधान के 89वें संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया बताया गया है। इसलिए अलग अनुसूचित जनजाति आयोग से जुड़ा संशोधन 89वां संशोधन ही है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) 73वां संशोधन पंचायती राज से जुड़ा था, इसलिए उसने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को अलग निकाय के रूप में स्थापित नहीं किया।
  • (C) 65वें संशोधन ने संयुक्त राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग की व्यवस्था से संबंध रखा, अलग अनुसूचित जनजाति आयोग अनुच्छेद 338ए के रूप में 89वें संशोधन से आया।
  • (D) 97वां संशोधन सहकारी समितियों से जुड़ा था, इसलिए उसका अलग राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना से संबंध नहीं है।

अवधारणा

यह प्रश्न संविधान संशोधनों और संवैधानिक आयोगों की पहचान को परखता है। आरएएस में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि अनुच्छेद 338 और 338ए जैसे प्रावधान कमजोर वर्गों की संवैधानिक सुरक्षा से सीधे जुड़े हैं।

स्रोत

संबंधित प्रश्न