RAS प्रश्न
न्यायाधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम प्रणाली किस मामले से स्थापित हुई?
सही उत्तर: (B) द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993)।
न्यायाधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम प्रणाली द्वितीय न्यायाधीश मामला, 1993 से स्थापित हुई, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश की राय को प्रधानता दी गई।
व्याख्या
द्वितीय न्यायाधीश मामला, यानी सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ, 1993, न्यायिक नियुक्तियों में निर्णायक मोड़ था। इसी मामले से कॉलेजियम प्रणाली स्थापित मानी जाती है, क्योंकि इसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश की राय को प्रधानता दी गई। इसी 1993 के निर्णय को द्वितीय न्यायाधीश मामला कहा गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की राय की प्रधानता और वरिष्ठ सहयोगी न्यायाधीशों से प्रभावी परामर्श के प्रश्नों पर विचार किया गया। तृतीय न्यायाधीश मामला, 1998 ने इस व्यवस्था को आगे विस्तृत करके मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों तक फैलाया।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) चतुर्थ न्यायाधीश मामला, 2015 ने NJAC को असंवैधानिक ठहराकर कॉलेजियम व्यवस्था को फिर बहाल किया; उसने कॉलेजियम प्रणाली पहली बार स्थापित नहीं की।
- (C) तृतीय न्यायाधीश मामला, 1998 ने कॉलेजियम का दायरा बढ़ाया, लेकिन व्यवस्था की स्थापना द्वितीय न्यायाधीश मामला, 1993 से मानी जाती है।
- (D) प्रथम न्यायाधीश मामला, 1982 ने नियुक्तियों में कार्यपालिका को प्रधानता दी थी, इसलिए वह कॉलेजियम प्रणाली की स्थापना वाला मामला नहीं था।
अवधारणा
यह प्रश्न संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायाधीशों की नियुक्ति-प्रक्रिया की समझ जांचता है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है क्योंकि प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ न्यायाधीश मामलों से कार्यपालिका-न्यायपालिका संबंधों का पूरा विकास समझ में आता है।
