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RAS प्रश्न

आबू के परमारों में किस नरेश ने मोहम्मद गौरी के विरुद्ध गुजरात पक्ष का नेतृत्व किया और सोलंकी प्रभुत्व से अलग हुआ?

सही उत्तर: (A) धारावर्ष।

1178 ईस्वी में आबू के परमार नरेश धारावर्ष ने मोहम्मद गौरी के विरुद्ध गुजरात की सेना का नेतृत्व किया और बाद में स्वयं को सोलंकी प्रभुत्व से पूरी तरह मुक्त कर लिया।

  1. (A)

    धारावर्ष

  2. (B)

    विमलशाह

  3. (C)

    तेजपाल

  4. (D)

    प्रह्लादन देव

व्याख्या

धारावर्ष सही उत्तर है, क्योंकि वह आबू के परमार वंश का था और उसे इस शाखा का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है। 1178 ईस्वी में मोहम्मद गौरी ने गुजरात के चालुक्य राजा मूलराज द्वितीय पर आक्रमण किया। कयन्द्रा के युद्ध में नायिका देवी ने गौरी को हराया, जबकि गुजरात की सेना का नेतृत्व धारावर्ष परमार ने किया; गुजरात की ओर से केल्हण और कीर्तिपाल सोनगरा भी उसके सहयोगी थे। धारावर्ष ने बाद में स्वयं को सोलंकी प्रभुत्व से पूरी तरह मुक्त कर लिया। गौरी के विरुद्ध गुजरात पक्ष का नेतृत्व और सोलंकी नियंत्रण से मुक्ति—ये दोनों बातें धारावर्ष की पहचान तय करती हैं, केवल किसी परमार शासक का नाम होना नहीं। बाकी विकल्पों में दिए नाम प्रशासन, मंदिर-निर्माण या साहित्य से जुड़े हैं, इस सैन्य-राजनीतिक भूमिका से नहीं।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (B) विमलशाह का संबंध आबू के प्रशासन और देलवाड़ा के आदिनाथ जैन विमलशाही मंदिर से है; उसने 1178 ईस्वी में गौरी के विरुद्ध गुजरात की सेना का नेतृत्व नहीं किया था।
  • (C) तेजपाल सोमसिंह का मंत्री था और उसे लूणवसही, यानी वस्तुपाल-तेजपाल मंदिर, के निर्माण से जोड़ा जाता है; वह इस युद्ध में सेना का नेतृत्व करने वाला नरेश नहीं था।
  • (D) प्रह्लादन देव धारावर्ष का विद्वान छोटा भाई था और साहित्यिक रचनाओं से जुड़ा था; गौरी के विरुद्ध गुजरात पक्ष का नेतृत्व करने वाला आबू का परमार नरेश धारावर्ष था, प्रह्लादन देव नहीं।

अवधारणा

मध्यकालीन राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में आबू के परमारों का महत्व इसलिए है कि वे कभी चालुक्य-सोलंकी शासकों के अधीन रहे और कभी स्वतंत्र होने की कोशिश करते रहे। उनका इतिहास मुस्लिम आक्रमणों के विरुद्ध क्षेत्रीय प्रतिरोध से भी जुड़ा है। RAS के प्रश्नों में राजवंश, युद्ध, अधीनता, राजकीय संरक्षण और मंदिर-निर्माण की परंपराएँ अक्सर एक साथ पूछी जाती हैं।

स्रोत

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