RAS प्रश्न
'राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025' के तहत अनुपालन न करने वाली संस्थाओं पर क्या जुर्माना है?
सही उत्तर: (B) कर्मचारियों के कुल पारिश्रमिक का 1%।
राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025 के तहत अनुपालन न करने वाली संस्था पर कुल कर्मचारियों के पारिश्रमिक के 1% की दर से दंड लगाया जाता है।
व्याख्या
राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025 में कर्मचारी को काम के घंटों के बाहर डिसकनेक्ट रहने का अधिकार दिया गया है। इसका अर्थ है कि नियोक्ता काम के बाद संपर्क कर सकता है, लेकिन कर्मचारी जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है और जवाब न देने पर उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इसी व्यवस्था को लागू कराने के लिए बिल संस्थाओं पर अनुपालन की जिम्मेदारी डालता है। धारा 19 के अनुसार, यदि किसी संस्था ने चार्टर में काम के बाहर की सेवा-शर्तें परिभाषित नहीं कीं, दूरस्थ कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए नीति में ऐसी शर्तें नहीं रखीं, या बिल के प्रावधानों का पालन नहीं किया, तो दंड कुल कर्मचारियों के पारिश्रमिक का 1% होगा।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) 10 लाख रुपये का निश्चित जुर्माना स्रोत में नहीं दिया गया है; बिल दंड को कुल कर्मचारियों के पारिश्रमिक के 1% से जोड़ता है।
- (C) वार्षिक कारोबार का 3% बिल में दंड का आधार नहीं है; दंड का आधार कारोबार नहीं, कर्मचारियों का कुल पारिश्रमिक है।
- (D) 6 महीने के लिए व्यापार लाइसेंस निलंबन का प्रावधान दिए गए बिल में नहीं है; गैर-अनुपालन पर आर्थिक दंड 1% कर्मचारी पारिश्रमिक है।
अवधारणा
यह प्रश्न श्रम-कल्याण और शासन में काम के घंटों के बाद डिजिटल संपर्क को नियंत्रित करने वाली विधायी व्यवस्था की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए आते हैं क्योंकि वे अधिकार, नियोक्ता-कर्मचारी संबंध और अनुपालन-आधारित दंड को सीधे जोड़ते हैं।
