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RAS प्रश्न

नकद आरक्षित अनुपात (CRR) क्या है?

सही उत्तर: (B) निवल माँग और सावधि देनदारियों का वह प्रतिशत जो बैंकों को RBI के पास नकद रखना चाहिए।

नकद आरक्षित अनुपात (CRR) बैंक की निवल माँग और सावधि देनदारियों (NDTL) का वह प्रतिशत है जिसे बैंक को RBI के पास नकद शेष के रूप में रखना होता है।

  1. (A)

    जमा का वह प्रतिशत जो बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना चाहिए

  2. (B)

    निवल माँग और सावधि देनदारियों का वह प्रतिशत जो बैंकों को RBI के पास नकद रखना चाहिए

  3. (C)

    लाभ का वह प्रतिशत जो बैंकों को आरक्षित रखना चाहिए

  4. (D)

    ऋण का वह प्रतिशत जो प्राथमिकता क्षेत्र को दिया जाना चाहिए

व्याख्या

CRR को समझने का सीधा तरीका यह है कि यह बैंक के लाभ, ऋण-वितरण या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर नहीं लगाया जाता, बल्कि बैंक की निवल माँग और सावधि देनदारियों (NDTL) पर आधारित नकद आरक्षित आवश्यकता है। RBI के CRR-SLR मास्टर सर्कुलर में CRR को अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की वैधानिक आरक्षित आवश्यकता के रूप में रखा गया है और इसमें RBI के पास रखे जाने वाले नकद शेष की बात आती है। इसलिए विकल्प B सही है: बैंक को अपनी NDTL का निर्धारित प्रतिशत RBI के पास नकद रखना पड़ता है। इस CRR शेष पर RBI कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए यह बैंक की कमाई वाला निवेश नहीं, बल्कि आरक्षित अनुपालन की अनिवार्य नकद व्यवस्था है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) यह SLR का विचार है, क्योंकि उसमें बैंक की देनदारियों के मुकाबले नकद, सोना या सरकारी प्रतिभूतियों जैसे स्वीकृत परिसंपत्तियों को रखने की बात आती है; CRR में नकद RBI के पास रखा जाता है।
  • (C) CRR बैंक के लाभ के प्रतिशत पर आधारित नहीं है; यह NDTL पर आधारित नकद आरक्षित आवश्यकता है, जबकि लाभ-आरक्षित अलग नियामकीय विषय है।
  • (D) यह प्राथमिकता क्षेत्र ऋण मानकों से जुड़ा कथन है, जबकि CRR ऋण बाँटने का लक्ष्य नहीं बल्कि RBI के पास रखे जाने वाले नकद आरक्षित का अनुपात है।

अवधारणा

यह प्रश्न भारतीय अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति और बैंकिंग विनियमन के तहत वैधानिक आरक्षित अनुपातों की मूल समझ जाँचता है। RAS में CRR और SLR जैसे शब्द इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि इन्हीं से RBI, बैंकों और आरक्षित अनुपालन का आधारभूत अंतर स्पष्ट होता है।

स्रोत

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