RAS प्रश्न
वल्लभाचार्य ने कौन सा दर्शन प्रतिपादित किया?
सही उत्तर: (B) शुद्धाद्वैत अर्थात् शुद्ध अद्वैतवाद।
वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत अर्थात् शुद्ध अद्वैतवाद का दर्शन प्रतिपादित किया।
व्याख्या
वल्लभाचार्य (1479-1531) से जुड़ा दर्शन शुद्धाद्वैत, यानी शुद्ध अद्वैतवाद, माना जाता है। उनके दार्शनिक तंत्र की पहचान शुद्ध अद्वैतवाद से होती है। यही कारण है कि विकल्प B सही है। इस मत में ईश्वर और जगत के संबंध को अद्वैत की दिशा में समझा जाता है, और संसार को माया नहीं, वास्तविक माना जाता है। वल्लभाचार्य के मत को पुष्टि मार्ग, यानी कृपा का मार्ग, से भी जोड़ा गया है। भक्ति का केंद्र कृष्ण हैं; कृष्ण को सर्वोच्च माना जाता है और सूरदास वल्लभाचार्य के प्रसिद्ध शिष्य माने जाते हैं। इसलिए यहां दर्शन-परंपरा की सीधी पहचान अपेक्षित है, किसी सामान्य भक्ति आंदोलन का नाम नहीं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) द्वैताद्वैत इसलिए सही नहीं है, क्योंकि वल्लभाचार्य के दार्शनिक तंत्र की पहचान शुद्धाद्वैत, यानी शुद्ध अद्वैतवाद, से होती है।
- (C) विशिष्टाद्वैत विकल्प वल्लभाचार्य से मेल नहीं खाता, क्योंकि वल्लभाचार्य से जुड़ा दर्शन शुद्धाद्वैत है।
- (D) द्वैत सही उत्तर नहीं है, क्योंकि वल्लभाचार्य का मत शुद्ध अद्वैतवाद माना जाता है, द्वैत नहीं।
अवधारणा
मध्यकालीन भक्ति परंपरा में आचार्यों और उनके दर्शन का मिलान समझना जरूरी है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं, क्योंकि दर्शन, संप्रदाय और प्रमुख भक्त-परंपराओं की पहचान सीधे तथ्य और अवधारणा दोनों स्तरों पर पूछी जाती है।
