RAS प्रश्न
भारत में उच्च पुरापाषाण उपकरणों की विशेषता है:
सही उत्तर: (A) ब्लेड और ब्यूरिन।
भारत में उच्च पुरापाषाण उपकरणों की मुख्य पहचान ब्लेड और ब्यूरिन से होती है।
व्याख्या
उच्च पुरापाषाण काल 40,000-10,000 ई.पू. के बीच माना जाता है और इसकी पहचान ब्लेड, ब्यूरिन तथा स्क्रेपर से होती है। ई-पीजी पाठशाला के पाठ में भी भारत में इस चरण को मुख्यतः प्रकार-विज्ञान के आधार पर पहचाना गया है और ब्लेड औजारों की उपस्थिति को स्पष्ट माना गया है। इसमें परिष्कृत ब्लेडों की अधिकता, ब्यूरिन, एंड स्क्रेपर और कुछ स्थलों पर हड्डी के औजारों का उल्लेख है। इसलिए प्रश्न में पूछा गया विशिष्ट औजार-समूह पॉलिश उपकरणों, हस्तकुठार-क्लीवर या केवल सूक्ष्मपाषाणों का नहीं, बल्कि ब्लेड और ब्यूरिन का है। भीमबेटका के ऊपरी स्तर और महाराष्ट्र का पटणे इसी उच्च पुरापाषाण संदर्भ में रखे गए हैं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) पॉलिश पत्थर उपकरण इस प्रश्न की उच्च पुरापाषाण पहचान में नहीं आते; व्याख्या और ई-पीजी पाठशाला दोनों ब्लेड, ब्यूरिन, स्क्रेपर तथा हड्डी के औजारों पर जोर देते हैं।
- (C) हस्तकुठार और क्लीवर को ई-पीजी पाठशाला निम्न पुरापाषाण के औजार-निर्माताओं से जोड़ती है, इसलिए वे उच्च पुरापाषाण की विशिष्ट पहचान नहीं हैं।
- (D) सूक्ष्मपाषाण कुछ खुले स्थलों पर उच्च पुरापाषाण ब्लेडों के साथ मिल सकते हैं, लेकिन उच्च पुरापाषाण की मुख्य पहचान परिष्कृत ब्लेडों और ब्यूरिन जैसे ब्लेड-आधारित औजारों से होती है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्रागैतिहासिक कालक्रम में औजार-प्रकारों की पहचान जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं, क्योंकि काल, तकनीक और स्थल को मिलाकर पूछे जाने पर गलत विकल्प बहुत आकर्षक लगते हैं।
