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RAS प्रश्न

RTI अधिनियम, 2005 की धारा 4 के तहत, प्रत्येक लोक प्राधिकरण को क्या करना आवश्यक है?

सही उत्तर: (D) स्वप्रेरणा से सूचना का खुलासा (स्वतः प्रकटन)।

RTI अधिनियम, 2005 की धारा 4 के तहत प्रत्येक लोक प्राधिकरण को स्वप्रेरणा से सूचना का प्रकटन करना होता है।

  1. (A)

    एक लोकपाल नियुक्त करना

  2. (B)

    सभी सरकारी निर्णय समाचार पत्रों में प्रकाशित करना

  3. (C)

    48 घंटे के भीतर RTI आवेदनों का उत्तर देना

  4. (D)

    स्वप्रेरणा से सूचना का खुलासा (स्वतः प्रकटन)

व्याख्या

धारा 4 लोक प्राधिकरणों पर केवल आवेदन आने पर जवाब देने की जिम्मेदारी नहीं डालती, बल्कि पहले से सूचना सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी भी तय करती है। इसमें संगठन, कार्य, कर्तव्य, अधिकारियों की शक्तियां, निर्णय प्रक्रिया, नियम, कर्मचारियों की निर्देशिका, मासिक पारिश्रमिक, बजट और संबंधित अभिलेखों जैसी सूचनाएं प्रकाशित करनी होती हैं। धारा 4 आगे कहती है कि लोक प्राधिकरण नियमित अंतराल पर विभिन्न माध्यमों, इंटरनेट सहित, से अधिक-से-अधिक सूचना स्वप्रेरणा से जनता को दें, ताकि लोगों को सूचना पाने के लिए RTI आवेदन का कम सहारा लेना पड़े। इसलिए यहां सही बात स्वतः प्रकटन है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) धारा 4 लोकपाल नियुक्त करने की बात नहीं करती; यह लोक प्राधिकरणों की सूचना प्रकाशित करने और अभिलेख व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी बताती है।
  • (B) धारा 4 हर सरकारी निर्णय को समाचार पत्रों में छापने का सामान्य आदेश नहीं देती; वह निर्दिष्ट सूचनाओं को व्यापक और सुलभ रूप में सार्वजनिक करने की बात करती है।
  • (C) 48 घंटे की समय-सीमा जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना के लिए धारा 7 में आती है, जबकि धारा 4 का केंद्र स्वप्रेरणा से सूचना प्रकटन है।

अवधारणा

यह प्रश्न RTI अधिनियम में पारदर्शिता और लोक प्राधिकरणों की जवाबदेही की मूल व्यवस्था को जांचता है। RAS में शासन, प्रशासनिक उत्तरदायित्व और नागरिक अधिकारों से जुड़े प्रश्नों में धारा 4 बार-बार पूछी जाती है।

स्रोत

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