RAS प्रश्न
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 35 के अंतर्गत कुछ मूल अधिकारों को प्रभावी बनाने वाले कानून बनाने की शक्ति किसमें निहित है, जैसे अस्पृश्यता के लिए दंड निर्धारित करना?
सही उत्तर: (D) केवल संसद में (राज्य विधानमंडलों में नहीं)।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 35 के तहत भाग III के कुछ मूल अधिकारों को प्रभावी करने और उनसे जुड़े अपराधों के लिए दंड निर्धारित करने की कानून बनाने की शक्ति केवल संसद में निहित है, राज्य विधानमंडलों में नहीं।
व्याख्या
अनुच्छेद 35 का केंद्रीय नियम यह है कि संविधान में कुछ भी होने पर भी इन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति संसद के पास होगी और राज्य विधानमंडल के पास नहीं होगी। इसमें वे विषय शामिल हैं जिन्हें भाग III में संसद द्वारा कानून से व्यवस्थित किया जाना है, और वे कृत्य भी जिनको इसी भाग में अपराध घोषित किया गया है। इसलिए अस्पृश्यता जैसे अनुच्छेद 17 से जुड़े अपराधों या अनुच्छेद 23 के तहत मानव तस्करी जैसे मामलों में दंड निर्धारित करने का अधिकार सीधे अनुच्छेद 35 से तय होता है। इसी कारण सही उत्तर केवल संसद है; यह शक्ति राज्यों के साथ समान रूप से साझा नहीं है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) केवल राज्य विधानमंडल सही नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 35 साफ कहता है कि ऐसे मामलों में राज्य विधानमंडल के पास कानून बनाने की शक्ति नहीं होगी।
- (B) केवल राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेशों के माध्यम से सही नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 35 शक्ति संसद को देता है, राष्ट्रपति के अध्यादेश को अकेला स्रोत नहीं बनाता।
- (C) संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों में समान रूप से कहना गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 35 इस क्षेत्र में संसद को शक्ति देता है और राज्य विधानमंडल को बाहर रखता है।
अवधारणा
यह प्रश्न मूल अधिकारों को लागू कराने वाली संवैधानिक विधायी शक्ति की सीमा जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि भाग III में अधिकारों के साथ-साथ उन्हें लागू कराने वाली संस्था और कानून बनाने की क्षमता भी पूछी जाती है।
