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RAS प्रश्न

तुर्रा कलंगी, राजस्थानी ख्याल का एक रूप है, जिसमें दो समूहों के बीच प्रदर्शन प्रतियोगिता होती है। ये दो समूह किनका प्रतिनिधित्व करते हैं?

सही उत्तर: (C) शिव (तुर्रा) और शक्ति (कलंगी)।

तुर्रा-कलंगी ख्याल में तुर्रा शिव या शैव पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है और कलंगी शक्ति पक्ष का।

  1. (A)

    राम और रावण

  2. (B)

    दिन और रात

  3. (C)

    शिव (तुर्रा) और शक्ति (कलंगी)

  4. (D)

    कृष्ण और कंस

व्याख्या

तुर्रा-कलंगी में मूल बात दो विरोधी अखाड़ों की टक्कर है, केवल कथा-प्रसंग नहीं। ख्याल की यह परंपरा सवाल-जवाब, सार्वजनिक वाद-विवाद और गायन से जुड़ी है; दो दल एक-दूसरे से प्रश्न और उत्तर करते हैं, और मुकाबला दंगल कहलाता है। इसी ढांचे में तुर्रा शैव पक्ष, यानी शिव, का समर्थन करता है, जबकि कलंगी शक्ति की प्रधानता का पक्ष लेती है। दोनों दल अपने अलग चिह्न रखते हैं; तुर्रा और कलंगी पगड़ी पर लगे पंख-गुच्छे या कलगी से जुड़े नाम हैं। राजस्थान में यह रूप ख्याल लोकनाट्य से जुड़कर चित्तौड़ और घोसुंडा क्षेत्र में अलग तुर्रा-कलंगी ख्याल के रूप में दिखता है। इसलिए सही जोड़ी शिव और शक्ति है, राम-रावण या कृष्ण-कंस जैसी कथात्मक प्रतिद्वंद्विता नहीं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) राम और रावण की टक्कर रामलीला की कथा-रेखा से जुड़ती है; तुर्रा-कलंगी में प्रतिद्वंद्विता शैव पक्ष और शक्ति पक्ष के अखाड़ों के बीच है।
  • (B) दिन और रात तुर्रा-कलंगी के प्रतीक नहीं हैं; इस परंपरा में दो दल सवाल-जवाब और दंगल के रूप में शिव-पक्ष और शक्ति-पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • (D) कृष्ण और कंस की विरोधी जोड़ी इस लोकनाट्य रूप की केंद्रीय पहचान नहीं है; तुर्रा-कलंगी का संकेत तुर्रा और कलंगी नामक प्रतिद्वंद्वी अखाड़ों से है।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थान की लोकनाट्य परंपराओं, खासकर ख्याल और अखाड़ा-आधारित प्रदर्शन प्रतियोगिता, की पहचान परखता है। आरएएस में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि कला-संस्कृति में रूप, प्रतीक और क्षेत्रीय परंपरा के सीधे तथ्य पूछे जाते हैं।

स्रोत

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