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RAS प्रश्न

तोल्काप्पियम, सबसे प्राचीन उपलब्ध तमिल व्याकरण, परंपरागत रूप से किसकी रचना मानी जाती है?

सही उत्तर: (A) तोल्काप्पियर।

तोल्काप्पियम तमिल की सबसे प्राचीन उपलब्ध व्याकरण-कृति है, जिसे परंपरागत रूप से तोल्काप्पियर की रचना माना जाता है।

  1. (A)

    तोल्काप्पियर

  2. (B)

    परनर

  3. (C)

    तिरुवल्लुवर

  4. (D)

    इलंगो अडिगल

व्याख्या

तोल्काप्पियम को परंपरागत रूप से ऋषि अगस्त्य के शिष्य तोल्काप्पियर की रचना माना जाता है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की ‘यूनिटी इन कल्चरल डाइवर्सिटी’ पुस्तक भी सीधे इस संबंध की पुष्टि करती है। तमिल साहित्य वाले भाग में तमिल की साहित्यिक परंपरा को संगम काल से जोड़ा गया है और तोल्काप्पियम को आज उपलब्ध कृतियों में गिनाते हुए व्याकरण की ऐसी पुस्तक बताया गया है जिसकी रचना तोल्काप्पियर की मानी जाती है। इसीलिए विकल्प A सही है। उसी पाठ में एट्टु तोगै, पट्टु पट्टु, सिलप्पादिकारम, मणिमेकलै और थिरु कुरल को तोल्काप्पियम से अलग कृतियाँ बताया गया है और हर कृति का अपना साहित्यिक संबंध दिया गया है। इसलिए तोल्काप्पियम की रचना किसी दूसरे साहित्यकार की नहीं मानी जा सकती।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (B) NCERT की ‘यूनिटी इन कल्चरल डाइवर्सिटी’ पुस्तक में परनर को तोल्काप्पियम से नहीं जोड़ा गया है; यह कृति परंपरागत रूप से तोल्काप्पियर की मानी जाती है।
  • (C) NCERT तिरुवल्लुवर को थिरु कुरल से जोड़ती है, जबकि तोल्काप्पियम को तोल्काप्पियर की रचना मानी जाने वाली व्याकरण-कृति बताती है।
  • (D) NCERT इलंगो अडिगल को सिलप्पादिकारम से जोड़ती है, तोल्काप्पियम से नहीं; तोल्काप्पियम की रचना तोल्काप्पियर की मानी जाती है।

अवधारणा

यह प्रश्न संगम-कालीन तमिल साहित्य और लेखक-ग्रंथ संबंधों की समझ जाँचता है। RAS में यह विषय बार-बार पूछा जाता है, क्योंकि प्राचीन साहित्यिक कृतियों से दक्षिण भारत के आरंभिक सांस्कृतिक इतिहास का काल-निर्धारण करने और उसे समझने में मदद मिलती है।

स्रोत

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