RAS प्रश्न
'अधिकार पृच्छा' (क्वो वारंटो) रिट किसके विरुद्ध जारी की जा सकती है?
सही उत्तर: (B) वह व्यक्ति जो बिना कानूनी प्राधिकार के सार्वजनिक पद धारण करता है।
अधिकार पृच्छा रिट उस व्यक्ति के विरुद्ध जारी की जाती है जो बिना कानूनी प्राधिकार के कोई सार्वजनिक पद धारण कर रहा हो।
व्याख्या
अधिकार पृच्छा का मूल मुद्दा यही है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद किस वैध अधिकार से धारण कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह उपाय ऐसे घुसपैठिए या पद-हड़पने वाले व्यक्ति के विरुद्ध है जो स्वतंत्र, वास्तविक सार्वजनिक पद पर बैठा हो। अदालत इस रिट में नियुक्ति की वैधता देखती है: क्या पद सार्वजनिक है, क्या पदधारी के पास कानूनी प्राधिकार है, और क्या नियुक्ति विधि या नियमों के अनुसार हुई है। पदधारी वैध अधिकार नहीं दिखा पाता, तो उसे उस पद से हटाया जा सकता है। इसलिए निर्णायक बात व्यक्ति की हैसियत नहीं, बल्कि सार्वजनिक पद पर उसके कानूनी अधिकार की कमी है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) केवल सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश होना उत्तर नहीं है; अधिकार पृच्छा की कसौटी यह है कि पदधारी सार्वजनिक पद बिना कानूनी प्राधिकार के धारण कर रहा है या नहीं।
- (C) बिना मुकदमे की हिरासत में रखा व्यक्ति सार्वजनिक पद पर अपने अधिकार का दावा नहीं कर रहा होता, जबकि अधिकार पृच्छा सार्वजनिक पद की वैधता की जांच करती है।
- (D) निजी कंपनी के अनुबंधात्मक दायित्वों का उल्लंघन सार्वजनिक पद के हड़पने का मामला नहीं है, इसलिए यह अधिकार पृच्छा की सीमित रिट के भीतर नहीं आता।
अवधारणा
संवैधानिक उपचारों में रिटों के उद्देश्य और सीमा की समझ जरूरी है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि समान दिखने वाली रिटों में सही तथ्य-स्थिति पहचानना जरूरी होता है।
