RAS प्रश्न
‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ रिट किस उद्देश्य से जारी की जाती है?
सही उत्तर: (C) निरोध की वैधता की जांच के लिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना।
बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट हिरासत में लिए गए व्यक्ति को न्यायालय के सामने पेश कराकर उसके निरोध की वैधता की जांच कराने के लिए जारी की जाती है।
व्याख्या
बंदी प्रत्यक्षीकरण का सीधा अर्थ है व्यक्ति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत कराना। सही विकल्प C है क्योंकि इस रिट का उद्देश्य हिरासत में रखे गए व्यक्ति की पेशी कराना और न्यायालय से यह जांच कराना है कि निरोध वैध है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस रिट को अवैध रोक या कैद के मामलों में तेज़ और प्रभावी उपाय माना है। इसका प्रमुख काम उस व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना है जिसे गैरकानूनी रूप से रोका गया हो; न्यायालय हिरासत की परिस्थितियां देखता है और निरोध अवैध पाए जाने पर रिहाई का आदेश दे सकता है। इसी कारण इसे मनमानी हिरासत के विरुद्ध सबसे मज़बूत सुरक्षा उपाय माना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A इसलिए गलत है क्योंकि इसमें सार्वजनिक अधिकारी से छूटा हुआ कर्तव्य करवाने की बात है, जबकि बंदी प्रत्यक्षीकरण हिरासत में व्यक्ति की पेशी और निरोध की वैधता तक सीमित है।
- (B) B इसलिए गलत है क्योंकि यह निचली अदालत को अधिकार-क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने वाला विचार है; बंदी प्रत्यक्षीकरण में मुख्य कसौटी यह होती है कि व्यक्ति को वैध रूप से रोका गया है या नहीं।
- (D) D इसलिए गलत है क्योंकि वह सार्वजनिक पद धारण करने के अधिकार पर सवाल उठाता है, जबकि इस रिट का संबंध किसी पद से नहीं बल्कि हिरासत में व्यक्ति की स्वतंत्रता से है।
अवधारणा
संविधान में रिटों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा का हिस्सा RAS तैयारी में महत्त्वपूर्ण है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा में यह बार-बार आता है क्योंकि रिटों की पहचान सीधे अधिकारों और न्यायालयी उपायों से जुड़ती है।
