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RAS प्रश्न

'खालिक बारी', जिसे अक्सर अमीर खुसरो से जोड़ा जाता है, ऐतिहासिक रूप से मुख्यतः इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह है:

सही उत्तर: (B) सबसे प्रारंभिक ज्ञात द्विभाषी हिंदी-फारसी शब्दकोशों और शब्दावलियों में से एक।

खालिक बारी ऐतिहासिक रूप से सबसे प्रारंभिक ज्ञात हिंदी-फारसी द्विभाषी शब्दावलियों में गिनी जाती है, हालांकि इसका अमीर खुसरो से संबंध निश्चित नहीं माना जाना चाहिए।

  1. (A)

    दिल्ली के किसी सुल्तान की पहली फारसी जीवनी

  2. (B)

    सबसे प्रारंभिक ज्ञात द्विभाषी हिंदी-फारसी शब्दकोशों और शब्दावलियों में से एक

  3. (C)

    हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के सिद्धांत पर पहला ग्रंथ

  4. (D)

    खुसरो से जुड़ी सूफी क़व्वालियों का संग्रह

व्याख्या

खालिक बारी का महत्व जीवनी, संगीत-शास्त्र या कव्वाली-संग्रह के रूप में नहीं, बल्कि हिंदी-हिंदवी और फारसी साहित्यिक संस्कृति से जुड़ी शब्दावली के रूप में है। इसे अमीर खुसरो से अक्सर जोड़ा जाता है, लेकिन यह सावधानी भी जरूरी है कि NCERT के अनुसार शायद यह उसी नाम के किसी बाद के कवि की रचना थी। eGyanKosh/IGNOU की भाषाएं और साहित्य इकाई भी बताती है कि खुसरो ने मिश्रित हिंदी में रचनाएं कीं, उस भाषा को हिंदवी कहा, और खालिक बारी में उनके कुछ हिंदी पद मिलते हैं; फिर भी यह कृति संभवतः बहुत बाद में लिखी गई थी। इसलिए सही बात यह है कि खालिक बारी को शुरुआती हिंदी-फारसी शब्दावली परंपरा में समझें, न कि खुसरो की निश्चित समकालीन रचना मानें।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) खालिक बारी शब्दावली और कोश-परंपरा से जुड़ी कृति है, किसी दिल्ली सुल्तान की फारसी जीवनी नहीं।
  • (C) खालिक बारी को संगीत-सिद्धांत का ग्रंथ बताना गलत है, क्योंकि इसे हिंदी-हिंदवी और फारसी शब्दावली से जोड़ा जाता है।
  • (D) कव्वाली संगीत और काव्य की विधा है, जबकि खालिक बारी का संदर्भ यहां द्विभाषी शब्दावली या कोश के रूप में है।

अवधारणा

यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में क्षेत्रीय भाषाओं, हिंदवी और फारसी साहित्यिक संस्कृति के संपर्क को परखता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार इसलिए आते हैं क्योंकि वे भाषा-इतिहास के साथ स्रोत-सावधानी, यानी किस कृति का श्रेय कितना निश्चित है, दोनों जांचते हैं।

स्रोत

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