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RAS प्रश्न

प्रस्तावना में 'पंथनिरपेक्ष' शब्द का अर्थ है:

सही उत्तर: (D) राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है।

प्रस्तावना में पंथनिरपेक्ष का अर्थ है कि राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है और किसी धर्म को बढ़ावा या भेदभाव का आधार नहीं बनाता।

  1. (A)

    राज्य धर्म का विरोधी है

  2. (B)

    धर्म पूरी तरह राजनीति से अलग है

  3. (C)

    राज्य का अपना धर्म है

  4. (D)

    राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है

व्याख्या

भारतीय पंथनिरपेक्षता का केंद्र धर्म-विरोध नहीं, बल्कि राज्य की समान दूरी और समान व्यवहार है। सर्वोच्च न्यायालय ने एस. आर. बोम्मई मामले का हवाला देते हुए कहा कि पंथनिरपेक्षता सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार की सकारात्मक अवधारणा है। इसी फैसले में प्रस्तावना के पंथनिरपेक्ष स्वरूप, 42वें संशोधन और अनुच्छेद 14, 15, 16 की समानता-व्यवस्था को साथ पढ़ा गया है। इसलिए राज्य किसी व्यक्ति के धर्म, आस्था या विश्वास को अधिकारों और अवसरों के मामले में निर्णायक आधार नहीं बना सकता। वह किसी खास धर्म को बढ़ावा नहीं देता और दूसरे धर्मों के साथ कमतर व्यवहार भी नहीं करता। इसी कारण सही अर्थ “राज्य सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है” है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) राज्य धर्म-विरोधी नहीं है, क्योंकि भारतीय पंथनिरपेक्षता में राज्य किसी खास धर्म के पक्ष या विरोध में खड़ा नहीं होता, बल्कि सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार रखता है।
  • (B) भारतीय पंथनिरपेक्षता का अर्थ धर्म और राज्य का पूर्ण अलगाव नहीं है, क्योंकि इसका केंद्र समान व्यवहार और किसी धर्म को बढ़ावा न देने की नीति है।
  • (C) राज्य का अपना धर्म होना पंथनिरपेक्षता के उलट है, क्योंकि राज्य किसी विशेष धर्म को प्राथमिकता नहीं दे सकता।

अवधारणा

प्रस्तावना, मूल संरचना और भारतीय पंथनिरपेक्षता की अवधारणा RAS में बार-बार आती है, क्योंकि पश्चिमी अलगाव-वादी अर्थ और भारतीय समान-व्यवहार वाले अर्थ में फर्क समझना जरूरी है।

स्रोत

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