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RAS प्रश्न

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2026 में जयपुर मेट्रो फेज-2 को मंजूरी दी। निम्नलिखित में से कौन सा इस परियोजना का सही वर्णन करता है?

सही उत्तर: (A) 13,037 करोड़ रुपये; 41 किमी उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर; 36 स्टेशन; सितंबर 2031 तक पूर्ण।

जयपुर मेट्रो फेज-2 13,037.66 करोड़ रुपये की 41 किमी लंबी उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर परियोजना है, जिसमें प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 36 स्टेशन होंगे और लक्ष्य सितंबर 2031 तक पूरा करने का है।

  1. (A)

    13,037 करोड़ रुपये; 41 किमी उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर; 36 स्टेशन; सितंबर 2031 तक पूर्ण

  2. (B)

    11,500 करोड़ रुपये; 35 किमी पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर; 30 स्टेशन; 2030 तक पूर्ण

  3. (C)

    15,000 करोड़ रुपये; 50 किमी कॉरिडोर; 40 स्टेशन; 2032 तक पूर्ण

  4. (D)

    13,037 करोड़ रुपये; 41 किमी पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर; 30 स्टेशन; 2030 तक पूर्ण

व्याख्या

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 अप्रैल 2026 को जयपुर मेट्रो फेज-2 को मंजूरी दी। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह 41 किमी लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर है, जो प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक जाएगा और इसमें 36 स्टेशन होंगे। कुल परियोजना लागत 13,037.66 करोड़ रुपये बताई गई है। इसे राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड लागू करेगा। इसलिए विकल्प A सही है, क्योंकि उसमें लागत, दिशा, लंबाई, स्टेशनों की संख्या और पूर्णता-लक्ष्य एक साथ स्रोत से मेल खाते हैं। स्रोत यह भी बताता है कि फेज-2 मौजूदा पूर्व-पश्चिम फेज-1 के साथ मिलकर जयपुर में व्यापक मेट्रो संपर्क देगा और इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) विकल्प B में लागत 11,500 करोड़ रुपये, 35 किमी पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर, 30 स्टेशन और 2030 लक्ष्य दिए गए हैं, जबकि स्रोत 13,037.66 करोड़ रुपये, 41 किमी उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर, 36 स्टेशन और सितंबर 2031 बताता है।
  • (C) विकल्प C की 15,000 करोड़ रुपये लागत, 50 किमी लंबाई, 40 स्टेशन और 2032 समय-सीमा स्रोत में दिए गए स्वीकृत आंकड़ों से मेल नहीं खाते।
  • (D) विकल्प D में लागत और 41 किमी लंबाई तो करीब हैं, लेकिन दिशा पूर्व-पश्चिम, 30 स्टेशन और 2030 लक्ष्य बताए गए हैं; स्रोत में फेज-2 उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर, 36 स्टेशन और सितंबर 2031 लक्ष्य है।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थान की समसामयिक विकास परियोजनाओं और शहरी परिवहन अवसंरचना की तथ्य-जांच पर आधारित है। आरएएस में ऐसी परियोजनाएं इसलिए दोहरती हैं क्योंकि इनमें लागत, मार्ग, क्रियान्वयन एजेंसी और समय-सीमा जैसे सीधे परीक्षोपयोगी बिंदु होते हैं।

स्रोत

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