RAS प्रश्न
अर्थव्यवस्था में 'जुड़वां घाटा' समस्या से क्या आशय है:
सही उत्तर: (B) राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा का एक साथ होना।
अर्थव्यवस्था में जुड़वां घाटा वह स्थिति है, जब राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा एक साथ मौजूद हों।
व्याख्या
जुड़वां घाटा परिकल्पना में दो अलग-अलग घाटों को साथ पढ़ा जाता है: सरकार का राजकोषीय घाटा और बाहरी क्षेत्र का चालू खाता घाटा। जब सरकार राजस्व से अधिक खर्च करती है तो राजकोषीय घाटा बनता है; ऐसी स्थिति में अधिक सरकारी उधारी निजी निवेश की जगह घटा सकती है और आयात बढ़ा सकती है। इससे चालू खाता घाटा, यानी निर्यात से अधिक आयात की स्थिति, पैदा हो सकती है। विश्व बैंक के आर्थिक अपडेट में भी जुड़वां घाटों को राजकोषीय और चालू खाते के घाटों के रूप में रखा गया है, इसलिए यहां सही जोड़ी राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) राजस्व घाटा और प्राथमिक घाटा दोनों सरकारी बजट के अंदर के घाटे हैं; जुड़वां घाटा में एक बजटीय घाटा और एक बाहरी क्षेत्र का चालू खाता घाटा साथ देखा जाता है।
- (C) बैंकों का NPA और कॉर्पोरेट हानि जुड़वां घाटा नहीं, बल्कि जुड़वां बैलेंस शीट समस्या से जुड़ा संकेत है।
- (D) व्यापार घाटा चालू खाते का केवल एक हिस्सा हो सकता है, और बजट अधिशेष घाटा नहीं है; जुड़वां घाटा में दो घाटे साथ होने चाहिए।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय अर्थव्यवस्था में राजकोषीय नीति और बाहरी क्षेत्र के संबंध को परखता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि बजट घाटा, चालू खाता और सरकारी उधारी जैसे मुद्दे नीति और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़े होते हैं।
