RAS प्रश्न
भारत में 'दोहरी बैलेंस शीट समस्या' किसे कहा जाता है:
सही उत्तर: (A) बैंकों की तनावग्रस्त बैलेंस शीट (NPA) और अत्यधिक ऋणग्रस्त कंपनियां।
भारत में दोहरी बैलेंस शीट समस्या का मतलब अत्यधिक ऋणग्रस्त कंपनियों और खराब ऋणों से दबे बैंकों की बैलेंस शीट पर एक साथ पड़े दबाव से है।
व्याख्या
दोहरी बैलेंस शीट समस्या में दबाव एक तरफ बैंकों पर होता है, क्योंकि उनके पास अधिक NPA या खराब ऋण जमा हो जाते हैं; दूसरी तरफ कंपनियों पर होता है, क्योंकि वे अत्यधिक कर्ज में होती हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 पर PIB की रिलीज़ में इसे साफ तौर पर अत्यधिक ऋणग्रस्त कंपनियों और खराब ऋणों से दबे बैंकों की समस्या बताया गया है। इसी कारण बैंक ऋण देने में धीमे पड़ते हैं और निवेश कमजोर होता है। इसलिए प्रश्न में सही पहचान बैंक बैलेंस शीट के NPA तनाव और कॉरपोरेट बैलेंस शीट के अधिक कर्ज वाले दबाव की संयुक्त स्थिति है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) उच्च मुद्रास्फीति और उच्च बेरोजगारी ठहराव-स्फीति से जुड़ी स्थिति है, जबकि दोहरी बैलेंस शीट समस्या बैंक और कंपनी बैलेंस शीट के दबाव से जुड़ी है।
- (C) राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा दोहरे घाटे की समस्या कहलाते हैं, दोहरी बैलेंस शीट समस्या नहीं।
- (D) व्यापार घाटा और बजट घाटा घाटों की स्थिति बताते हैं, जबकि इस प्रश्न की समस्या खराब ऋणों से दबे बैंक और अधिक कर्ज वाली कंपनियां हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग क्षेत्र, NPA और निजी निवेश के संबंध को जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि आर्थिक सर्वेक्षण की ऐसी अवधारणाएं वृद्धि, निवेश और वित्तीय क्षेत्र की समझ से सीधे जुड़ती हैं।
