RAS प्रश्न
राजपूताना राज्यों की ब्रिटिश संधियों (1817-1818) को सामान्यतः क्या कहा जाता है?
सही उत्तर: (B) सहायक संधि के समझौते।
1817-1818 में राजपूताना राज्यों और अंग्रेज़ों के बीच हुई संधियाँ आमतौर पर सहायक संधियाँ कहलाती हैं।
व्याख्या
राजपूताना राज्यों और अंग्रेज़ों के बीच 1817-1818 में हुई संधियों को सहायक संधियाँ माना जाता है, क्योंकि राजपूत शासकों ने बाहरी मामलों में ब्रिटिश सर्वोच्चता स्वीकार की और बदले में उन्हें ब्रिटिश सुरक्षा मिली। सहायक संधि वह व्यवस्था थी जो किसी भारतीय राज्य और किसी यूरोपीय ईस्ट इंडिया कंपनी, खासकर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी, के बीच की जाती थी। इसमें शासक को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा मिलती थी, लेकिन उसे बाहरी संबंधों पर ब्रिटिश नियंत्रण स्वीकार करना और राजनयिक पत्राचार की निगरानी के लिए एक ब्रिटिश रेज़िडेंट रखना पड़ता था। जयपुर और जोधपुर जैसे राजपूत राज्य 1818 में ऐसी संधियों में शामिल हुए। इसलिए 1817-1818 का समय और इन संधियों की शर्तें बताती हैं कि यहाँ किसी एक विशेष नाम वाली संधि की नहीं, सहायक संधि व्यवस्था की बात हो रही है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) सूरत की संधि एक विशिष्ट संधि है। इसके विपरीत, प्रश्न 1817-1818 में राजपूताना राज्यों और अंग्रेज़ों के बीच हुई संधियों का सामान्य नाम पूछता है, जिसका उत्तर सहायक संधि है।
- (C) सगौली की संधि एक विशिष्ट संधि है और यह उस व्यवस्था का नाम नहीं है जिसमें राजपूताना राज्यों ने ब्रिटिश सुरक्षा और सर्वोच्चता स्वीकार की थी। उस व्यवस्था को सहायक संधि कहा जाता है।
- (D) बेसिन की संधि एक विशिष्ट संधि है; यह राजपूताना राज्यों और अंग्रेज़ों के बीच 1817-1818 में हुई संधियों का सामान्य नाम नहीं है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के इतिहास में ब्रिटिश विस्तार और रियासतों के साथ उनके संबंधों की समझ जाँचता है। RAS में यह विषय बार-बार पूछा जाता है, क्योंकि राजपूताना किस तरह ब्रिटिश सर्वोच्चता के अधीन आया, इसे आमतौर पर सहायक संधि व्यवस्था के ज़रिए समझाया जाता है।
