RAS प्रश्न
तेंदुलकर समिति (2009) ने किसके आधार पर गरीबी का अनुमान लगाया:
सही उत्तर: (A) मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय।
तेंदुलकर समिति पद्धति में गरीबी रेखा को मिश्रित संदर्भ अवधि पर आधारित मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय के रूप में व्यक्त किया गया।
व्याख्या
तेंदुलकर समिति का आधार आय या संपत्ति नहीं, बल्कि उपभोग व्यय था। आधिकारिक SDG राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा प्रगति रिपोर्ट 2025 में राष्ट्रीय गरीबी रेखा के संकेतक के संदर्भ में कहा गया है कि गरीबी के स्तर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षणों के आधार पर अनुमानित किए जाते हैं। गरीबी रेखा तेंदुलकर समिति रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार है और तेंदुलकर पद्धति में इसे मिश्रित संदर्भ अवधि पर आधारित मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय के रूप में व्यक्त किया गया। इसलिए विकल्प A सही है। पहले की कैलोरी-आधारित सोच से हटकर यह पद्धति उपभोग व्यय को गरीबी अनुमान का आधार बनाती है; इसी पद्धति से 2011-12 में गरीबी रेखा से नीचे आबादी 21.9% बताई गई।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) वार्षिक घरेलू आय गलत है, क्योंकि तेंदुलकर पद्धति में गरीबी रेखा आय के बजाय मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय के रूप में व्यक्त की गई।
- (C) केवल कैलोरी सेवन गलत है, क्योंकि तेंदुलकर समिति पहले के कैलोरी-आधारित दृष्टिकोण से हटकर उपभोग व्यय पर आई।
- (D) संपत्ति स्वामित्व गलत है, क्योंकि आधिकारिक स्रोत गरीबी के स्तर को उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षणों और गरीबी रेखा को मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय से जोड़ता है, संपत्ति से नहीं।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय अर्थव्यवस्था में गरीबी मापन और गरीबी रेखा की पद्धति की समझ जांचता है। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि योजनाओं, सामाजिक क्षेत्र और विकास-सूचकांकों को समझने के लिए गरीबी अनुमान का आधार साफ होना जरूरी है।
