RAS प्रश्न
सूफ़ी सिद्धांत 'वहदत-उल-वुजूद' (अस्तित्व की एकता) किसने प्रतिपादित किया?
सही उत्तर: (B) इब्न अल-अरबी (और भारत में मुहियुद्दीन इब्न अरबी के अनुयायियों द्वारा लोकप्रिय)।
वहदत-उल-वुजूद या अस्तित्व की एकता का सिद्धांत सूफी दार्शनिक इब्न अल-अरबी से संबद्ध माना जाता है।
व्याख्या
वहदत-उल-वुजूद का मूल आशय यह है कि वास्तविक अस्तित्व केवल ईश्वर का है; सृष्टि की अलग-अलग दिखाई देने वाली बहुलता अपने आप में स्वतंत्र सत्ता नहीं रखती। इब्न अल-अरबी पर लेख में अस्तित्व की एकता को उनके सबसे विवादास्पद सिद्धांतों में रखा गया है और बताया गया है कि बाद के अनेक मुस्लिम विद्वानों ने इसे उनसे संबद्ध किया। लेख यह सावधानी भी जोड़ता है कि इब्न अल-अरबी ने अपने लेखन में ठीक यही पद नहीं लिखा, लेकिन उनकी पुस्तकों में अस्तित्व की एकता से जुड़ी धारणाएँ स्पष्ट रूप से विकसित मिलती हैं। इसी कारण बहुविकल्पीय प्रश्न में सही उत्तर इब्न अल-अरबी है। भारत के संदर्भ में चिश्ती सिलसिले ने इस विचार को अपनाया, जबकि शेख अहमद सरहिंदी के वहदत-उल-शुहूद ने ईश्वर और सृष्टि को अलग माना।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) अल-ग़ज़ाली वहदत-उल-वुजूद के प्रतिपादक के रूप में नहीं आते; सही संबद्धता इब्न अल-अरबी से है।
- (C) पैगम्बर मुहम्मद को इस सूफी दार्शनिक सिद्धांत का प्रतिपादक नहीं बताया गया है; प्रश्न एक बाद की सूफी अवधारणा की पहचान पूछता है।
- (D) रूमी सूफी परंपरा से जुड़े हैं, लेकिन वहदत-उल-वुजूद की दार्शनिक संबद्धता इब्न अल-अरबी से रखी गई है।
अवधारणा
यह प्रश्न मध्यकालीन भारतीय इतिहास में सूफी विचारधारा और सिलसिलों की वैचारिक पहचान को परखता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि भक्ति-सूफी परंपरा, चिश्ती प्रभाव और धार्मिक विचारधाराओं के अंतर परीक्षा के स्थायी विषय हैं।
