RAS प्रश्न
लोकसभा अध्यक्ष मतदान कर सकते हैं:
सही उत्तर: (C) केवल बराबरी की स्थिति में (निर्णायक मत)।
लोकसभा अध्यक्ष पहली बार मतदान नहीं करते; मतों की बराबरी होने पर ही वे निर्णायक मत देते हैं।
व्याख्या
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 100(1) में सदन में मतदान का नियम साफ है: किसी बैठक में प्रश्नों का फैसला उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होगा, लेकिन इसमें अध्यक्ष या अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे व्यक्ति का सामान्य मत शामिल नहीं होता। इसी अनुच्छेद में आगे कहा गया है कि अध्यक्ष पहली बार मतदान नहीं करेंगे, पर मतों की बराबरी होने पर उनके पास निर्णायक मत होगा और वे उसका प्रयोग करेंगे। इसलिए लोकसभा अध्यक्ष हर प्रश्न पर सामान्य सदस्य की तरह मत नहीं देते। उनका मत केवल बराबरी तोड़ने के लिए आता है, जिससे सामान्य मतदान में अध्यक्ष की निष्पक्षता बनी रहती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) अनुच्छेद 100(1) अध्यक्ष के निर्णायक मत को राष्ट्रीय महत्व जैसे किसी विषय-आधारित प्रतिबंध से नहीं जोड़ता; शर्त केवल मतों की बराबरी है।
- (B) सदन के समक्ष प्रत्येक प्रश्न पर अध्यक्ष सामान्य मत नहीं देते, क्योंकि अनुच्छेद 100(1) उन्हें पहली बार मतदान से अलग रखता है।
- (D) यह कहना गलत है कि अध्यक्ष कभी मतदान नहीं कर सकते, क्योंकि मतों की बराबरी होने पर संविधान उन्हें निर्णायक मत देता है।
अवधारणा
यह प्रश्न संसदीय कार्यवाही में मतदान और पीठासीन अधिकारी की भूमिका से जुड़ा है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि वे संवैधानिक पदों की शक्ति और उनकी सीमा दोनों जांचते हैं।
