RAS प्रश्न
वैशाली में आयोजित द्वितीय बौद्ध संगीति का प्रमुख परिणाम क्या था?
सही उत्तर: (C) प्रथम विभाजन - स्थविरवाद बनाम महासांघिक।
वैशाली में हुई द्वितीय बौद्ध संगीति का प्रमुख परिणाम बौद्ध संघ का पहला बड़ा विभाजन था, जिसमें स्थविरवादी और महासांघिक दो धाराएँ बनीं।
व्याख्या
द्वितीय बौद्ध संगीति बुद्ध की मृत्यु के लगभग 100 वर्ष बाद, करीब 383 ईसा पूर्व, वैशाली में राजा कालाशोक के समय हुई और इसकी अध्यक्षता सबकामी ने की। इसका मुद्दा बौद्ध संघ के भीतर मठ-अनुशासन की व्याख्या और 10 छोटे नियमों को लेकर पैदा विवाद था। इसी विवाद के बाद संघ दो भागों में बँट गया। स्थविर पक्ष मूल शिक्षाओं और नियमों के कड़े पालन पर ज़ोर देता था, जबकि महासांघिक पक्ष अपेक्षाकृत उदार रुख रखता था। इसलिए इस संगीति का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्थान या अध्यक्ष नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म में पहला बड़ा संगठनात्मक विभाजन है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) अभिधम्म पिटक का औपचारिक संकलन द्वितीय संगीति का परिणाम नहीं था; यह अशोक के समय पाटलिपुत्र में हुई तृतीय बौद्ध संगीति से जुड़ा है।
- (B) ग्रंथों का संस्कृत में अनुवाद वैशाली की द्वितीय संगीति का परिणाम नहीं था; यह चतुर्थ संगीति से संबंधित माना जाता है।
- (D) महायान बौद्ध धर्म को अपनाना द्वितीय संगीति का परिणाम नहीं था; हीनयान और महायान का विभाजन बाद में, कनिष्क के समय चतुर्थ संगीति के आसपास माना जाता है।
अवधारणा
प्राचीन भारत में बौद्ध संगीति और बौद्ध संप्रदायों के विकास की समझ RAS के लिए महत्वपूर्ण है। RAS में यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि संगीति, स्थान, संरक्षक, अध्यक्ष और परिणाम को मिलाकर तथ्यात्मक और कारण-परिणाम दोनों तरह से पूछा जा सकता है।
