RAS प्रश्न
संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से किस संशोधन द्वारा हटाया गया?
सही उत्तर: (B) 44वां संशोधन।
संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा हटाया गया और अनुच्छेद 300A के तहत कानूनी अधिकार बनाया गया।
व्याख्या
44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने संपत्ति के अधिकार की संवैधानिक स्थिति बदल दी। पहले यह भाग III में मौलिक अधिकारों से जुड़ा था, पर इस संशोधन ने अनुच्छेद 31 को निरसित कर दिया। भारत के संविधान के आधिकारिक पाठ में अनुच्छेद 31 के सामने साफ लिखा है कि इसे 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 की धारा 6 से हटाया गया। उसी आधिकारिक पाठ में भाग XII के अंतर्गत अनुच्छेद 300A जोड़ा गया है, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से केवल विधि के अधिकार से ही वंचित किया जा सकता है। इसलिए अब संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार है। यह बदलाव प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार के समय लागू हुआ।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) 46वां संशोधन वह संशोधन नहीं है जिससे अनुच्छेद 31 हटाया गया या अनुच्छेद 300A जोड़ा गया; यह काम 44वें संशोधन से हुआ।
- (C) 43वें संशोधन ने 42वें संशोधन से प्रभावित न्यायपालिका संबंधी कुछ शक्तियों को बहाल करने से जुड़ा काम किया, संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों से नहीं हटाया।
- (D) 42वें संशोधन ने आपातकाल के दौर में कई बदलाव किए, लेकिन संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A में रखने वाला संशोधन 44वां था।
अवधारणा
यह प्रश्न मौलिक अधिकारों में संशोधन और संपत्ति के अधिकार की मौजूदा संवैधानिक स्थिति की जांच करता है। RAS में यह इसलिए बार-बार पूछा जाता है क्योंकि अनुच्छेद 31, भाग III और अनुच्छेद 300A के बीच का बदलाव सीधे भारतीय संविधान के विकास से जुड़ा है।
