RAS प्रश्न
राजस्थानी परंपरा 'पट्टा चित्रकला' (कपड़े पर लघुचित्र) किस चित्रकला शैली से जुड़ी है?
सही उत्तर: (A) नाथद्वारा शैली (वल्लभ संप्रदाय परंपरा)।
राजस्थानी पट्टा चित्रकला, यानी कपड़े पर बने छोटे भक्ति-चित्र, नाथद्वारा शैली और वल्लभ संप्रदाय की श्रीनाथजी परंपरा से जुड़ी है।
व्याख्या
पट्टा चित्रकला का संबंध नाथद्वारा शैली से इसलिए है क्योंकि यह उसी भक्ति-कला वातावरण में समझी जाती है जिसमें पिछवाई विकसित हुई। पट्टा चित्र पिछवाई से छोटे, साथ ले जाने योग्य कपड़ा-चित्र होते हैं और इनमें श्रीनाथजी को अलग-अलग मौसमी श्रृंगारों में दिखाया जाता है। पिछवाई कला राजस्थान के नाथद्वारा में वल्लभाचार्य परंपरा के वैष्णवों से जुड़ी रही, मंदिरों में श्रीनाथजी की कथाएँ दिखाती थी, और कपड़े पर रंग लगाने की तकनीक में मोटे सूती कपड़े, बाइंडर तथा वनस्पति/खनिज रंगों का प्रयोग होता था। इसलिए कपड़े पर बने लघुचित्र की पहचान सीधे नाथद्वारा-वल्लभ संप्रदाय परंपरा की ओर जाती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) पहाड़ी शैली हिमालयी पहाड़ी क्षेत्र की चित्रकला परंपरा है, जबकि पट्टा चित्रकला कपड़े पर बने श्रीनाथजी-केन्द्रित नाथद्वारा भक्ति-चित्रों से जुड़ी है।
- (C) बंगाल शैली आधुनिक राष्ट्रवादी कला से जुड़ी मानी जाती है; यह नाथद्वारा में विकसित श्रीनाथजी और वल्लभ संप्रदाय वाली कपड़ा-चित्र परंपरा नहीं है।
- (D) मुगल शैली अलग दरबारी चित्रकला परंपरा है, जबकि पट्टा और पिछवाई नाथद्वारा के वैष्णव भक्ति-चित्रों से जुड़े हैं।
अवधारणा
राजस्थान की चित्रकला शैलियों में स्थानीय धर्म-संप्रदाय, माध्यम और विषय-वस्तु का संबंध महत्वपूर्ण है। RAS में नाथद्वारा, पिछवाई, श्रीनाथजी और राजस्थानी लघुचित्र बार-बार इसलिए आते हैं क्योंकि ये कला और धार्मिक-सांस्कृतिक इतिहास दोनों को जोड़ते हैं।
