RAS प्रश्न
राजस्थानी मौखिक परंपरा में ख्याल/ख्याल का अर्थ है:
सही उत्तर: (B) विचार या कल्पना (लोक नाट्य का एक रूप)।
राजस्थानी मौखिक परंपरा में ख्याल/खयाल का मूल अर्थ विचार या कल्पना है, और यह संगीत, नृत्य और नाटक से जुड़ा लोक नाट्य रूप है।
व्याख्या
ख्याल को केवल शब्दार्थ से नहीं, उसके रंगमंचीय रूप से भी समझना चाहिए। इसका शाब्दिक अर्थ विचार या कल्पना है और यह लोक नाट्य का रूप है, जिसमें संगीत, नृत्य और नाटक साथ आते हैं। यक्षगान राजस्थान के ख्याल को लयात्मक स्वभाव वाला नाट्य रूप बताता है और नाम को उर्दू शब्द ख्याल, यानी कल्पना, से जोड़ता है। वजह यह है कि ख्याल में यथार्थवादी सज्जा पर जोर नहीं होता; प्रस्तुति दर्शकों की कल्पना पर टिकती है। इसी कारण विकल्प B ठीक बैठता है। इसके रूपों में तुर्रा-कलंगी, कुचामणी, शेखावाटी और हाड़ौती ख्याल गिने जाते हैं, तथा पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएँ प्रस्तुत की जाती हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) ख्याल का संबंध हथियार से नहीं है; यह राजस्थान की लोक-नाट्य परंपरा से जुड़ा है।
- (C) ख्याल को केवल नृत्य कहना अधूरा है, क्योंकि यह संगीत, नृत्य और नाटक को जोड़ने वाला लोक नाट्य रूप है।
- (D) ख्याल भोजन का प्रकार नहीं है; यक्षगान इसे राजस्थान का नाट्य रूप बताता है और उसका नाम कल्पना से जोड़ता है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की लोक नाट्य और मौखिक परंपराओं की पहचान परखता है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि कला-संस्कृति में शब्दार्थ, क्षेत्रीय रूप और प्रस्तुति-परंपरा को साथ समझना पड़ता है।
