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RAS प्रश्न

'राजस्थानी ओढ़नी' (सिर ढकने वाला घूंघट) पारंपरिक रूप से किस पोशाक के हिस्से के रूप में पहनी जाती है?

सही उत्तर: (C) पर्दा और घूंघट प्रथा, जो शालीनता और बड़ों के प्रति सम्मान दर्शाती है।

राजस्थानी ओढ़नी पारंपरिक रूप से पर्दा/घूंघट प्रथा से जुड़ी पोशाक का हिस्सा है, जो शालीनता और बड़ों के प्रति सम्मान को दर्शाती है।

  1. (A)

    सिर्फ फैशन दिखाने के लिए

  2. (B)

    केवल सोते समय

  3. (C)

    पर्दा और घूंघट प्रथा, जो शालीनता और बड़ों के प्रति सम्मान दर्शाती है

  4. (D)

    केवल बारिश से बचाव के लिए

व्याख्या

ओढ़नी, जिसे चूनरी या घूंघट भी कहा जाता है, राजस्थानी महिलाओं की पारंपरिक पोशाक का अनिवार्य अंग है। राजस्थानी स्त्री-वेश में ऊपरी वस्त्र, घाघरा और ओढ़ना/ओढ़नी का संयोजन शामिल होता है। ओढ़नी सिर पर ली जाती है और शरीर के ऊपरी भाग को ढकती है, इसलिए यह केवल सजावट नहीं रहती। विवाहित महिलाएँ बड़े पुरुष रिश्तेदारों की उपस्थिति में सिर ढकती हैं; यही घूंघट प्रथा है। ओढ़नी समुदाय, सामाजिक और वैवाहिक स्थिति तथा शालीनता का प्रतीक भी मानी जाती है, और राजपूत महिलाओं में यह पर्दे के रूप में चेहरे को ढकने से जुड़ी रही है। इसलिए विकल्प C सही है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) ओढ़नी को केवल फैशन कहना गलत है, क्योंकि वह राजस्थानी स्त्री-वेश, शालीनता, समुदाय और वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है।
  • (B) ओढ़नी केवल सोते समय पहनी जाने वाली वस्तु नहीं है; वह पारंपरिक पोशाक के रूप में सिर और ऊपरी भाग पर धारण की जाती है।
  • (D) ओढ़नी का अर्थ केवल बारिश से बचाव नहीं है, क्योंकि उसका मुख्य संदर्भ घूंघट, पर्दा, शालीनता और सामाजिक-वैवाहिक पहचान से जुड़ा है।

अवधारणा

राजस्थान की लोक-पोशाक और सामाजिक रीति-रिवाजों का गहरा संबंध है। RAS में ऐसे तथ्य बार-बार आते हैं क्योंकि कला-संस्कृति में वस्त्र केवल पहनावा नहीं, सामाजिक संकेत भी होते हैं।

स्रोत

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