RAS प्रश्न
राष्ट्रपति निम्नलिखित में से किस पर पूर्ण निषेधाधिकार का प्रयोग कर सकते हैं?
सही उत्तर: (C) राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित राज्य विधेयक।
राष्ट्रपति अनुच्छेद 201 के तहत राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित राज्य विधेयक पर सहमति रोककर पूर्ण निषेधाधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
व्याख्या
अनुच्छेद 201 इस स्थिति को अलग से बताता है: जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करता है, तब राष्ट्रपति घोषित करते हैं कि वे विधेयक को सहमति देते हैं या उससे सहमति रोकते हैं। यही सहमति रोकना पूर्ण निषेधाधिकार है, क्योंकि ऐसे आरक्षित राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति के लिए सहमति देना बाध्यकारी नहीं है और कोई समय सीमा भी निर्धारित नहीं है। यदि विधेयक धन विधेयक नहीं है तो राष्ट्रपति राज्यपाल को उसे संदेश सहित राज्य विधानमंडल को लौटाने का निर्देश दे सकते हैं; फिर दोबारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के विचार के लिए फिर प्रस्तुत होता है। इसलिए पूर्ण निषेधाधिकार की यह स्थिति राज्यपाल द्वारा आरक्षित राज्य विधेयक से जुड़ी है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) धन विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से जुड़ा होता है, इसलिए उस पर पूर्ण निषेधाधिकार वाली आरक्षित राज्य विधेयक की स्थिति लागू नहीं होती।
- (B) संविधान संशोधन विधेयक संसद से विधिवत पारित होने पर राष्ट्रपति की सहमति के लिए बाध्य श्रेणी में आता है, इसलिए यह पूर्ण निषेधाधिकार का उदाहरण नहीं है।
- (D) संयुक्त बैठक में पारित साधारण विधेयक सामान्यतः राष्ट्रपति की सहमति पाता है, जबकि अनुच्छेद 201 वाली सहमति रोकने की स्पष्ट स्थिति राज्यपाल द्वारा आरक्षित राज्य विधेयक से जुड़ी है।
अवधारणा
यह प्रश्न राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों और राज्यपाल द्वारा आरक्षित विधेयकों पर राष्ट्रपति की भूमिका की समझ जांचता है। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि अनुच्छेद 200 और 201 के बीच की बारीकियां राज्य-केन्द्र संबंधों से सीधा जुड़ती हैं।
